चीन व साउथ एशिया में कोरोना के पलटवार से भारत अलर्ट, 5-T पर जोर
नई दिल्ली । चीन व साउथ एशिया में कोरोना के बढ़ते केस से भारत अलर्ट हो गया है। होली की धूमधाम के बाद केंद्रीय स्वाथ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्य सरकारों को पत्र भेजकर 5-T यानि टेस्ट-ट्रैक-टीकाकरण-ट्रीट-टोटल प्रोटोकॉल के पालन पर जोर दिया है। वही , शोध में खुलासा हुआ है कि कोविड-19 के अलग-अलग टीकों को मिलाने (Mixing of Vacc fcines) को लेकर भारत में मौजूद प्रारंभिक वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुसार, जब कोविशील्ड (Covishield) को बूस्टर (तीसरी खुराक) डोज के रूप में उन लोगों को दिया जाता है, जो पहले कोवैक्सिन (Covaxin) की 2 खुराक ले चुके हैं, तो उनमें एंटीबॉडी (Antibody) लेवल छह गुना बढ़ जाता है. हालांकि, अगर कोविशिल्ड की 2 खुराक लेने वालों को बूस्टर डोज के रूप में कोवैक्सिन लगाया जाता है, तो एंटीबॉडी लेवल उतना ज्यादा नहीं बढ़ता है.
वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज ने बुधवार को भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को वैक्सीन मिक्सिंग के शुरुआती नतीजे सौंपे थे. बूस्टर डोज के लिए दो अलग-अलग टीकों को मिलाने पर क्या नतीजे मिलते हैं, इसको लेकर भारत का यह पहला वैज्ञानिक प्रमाण है. वर्तमान में, भारत में 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को “एहतियाती” तीसरी खुराक उसी टीके की दी जा रही है, जिसकी पहली दोनों खुराक उन्होंने लगवाई हुई है.
एक अन्य महत्वपूर्ण डेटा कुछ दिनों में सामने आ जाएगा
सूत्रों ने कहा कि कोविशील्ड और कोवैक्सिन टीकों को मिलाने के बाद एंटीबॉडी और टी-सेल प्रतिक्रिया को बेअसर करने से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा एक सप्ताह में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा. फाइनल डेटा के आधार पर, टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) द्वारा थर्ड या बूस्टर डोज के रूप में एक अलग वैक्सीन लगाने को लेकर निर्णय लेने की उम्मीद है.
वर्तमान में, भारत बायोलॉजिकल-ई के कॉर्बेवैक्स, भारत बायोटेक के इंट्रानैसल वैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोवावैक्स के मिश्रण के प्रभाव का भी अध्ययन कर रहा है. इन अध्ययनों से निकलने वाले आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि वैज्ञानिक 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए एहतियाती खुराक का विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं.
केंद्रीय मंत्री ने दिया आक्रामक जीनोम सीक्वेंसिंग का निर्देश
सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया की ओर से कोविड-19 टास्क फोर्स के अधिकारियों को कोरोना वायरस के संभावित नए वेरिएंट का पता लगाने के लिए सैंपल्स की आक्रामक जीनोम सीक्वेंसिंग करने का निर्देश दिया गया. इसके अतिरिक्त, मंडाविया ने स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से हॉटस्पॉट की शीघ्र पहचान के लिए निगरानी तेज करने को कहा. इस बैठक में कोविड-19 टास्क फोर्स के प्रमुख डॉ वीके पॉल, एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया, आईसीएमआर प्रमुख डॉ बलराम भार्गव, प्रधानमंत्री के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण शामिल हुए.
Covishied Bach gai hai isliye buster mai use karna,😀😀
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