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भाभी के थप्पड़ से नाराज होकर घर छोड़ने वाले बालक बन गए दो पीठों के शंकाराचार्य


आंसुओं से भीग गई परमहंसी गंगा आश्रम की धरती 

सनातन धर्म के सर्वोच्च अधिष्ठाता द्विपीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वति महाराज की भू-समाधि में शामिल हुए शिवराज, कमलनाथ, दिग्विजय व विवेक तन्खा सहित कई दिग्गज 

जबलपुर। भक्तों के आंसुओं से झोतेश्वर(गोटेगांव) स्थित परमहंसी गंगा आश्रम की धरती भीग गई। सनातन धर्म के सर्वोच्च अधिष्ठाता, द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वति महाराज को भावभीने माहौल में विधिविधान से भू-समाधि दी गई। यहां अंतिम दर्शन के लिए आए 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के बीच केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटैल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री द्वय कमलनाथ व दिग्विजय सिंह, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा सहित अनेक दिग्गज मौजूद रहे। राजकीय सम्मान के साथ महाराजश्री को विदाई दी गई। 

 उनकी जीवन यात्र की शुरुआत का ये पहलू भी चमत्कारिक

 ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वति महाराज की जीवन यात्र सनातन धर्म के लिए ही समर्पित रही, लेकिन बाल्यकाल में घर-परिवार छोड़कर निकले पांच भाइयों में सबसे छोटे पोथीराम उपाध्याय पूरे विश्व के सनातनधर्मियों की प्रेरणा बनेंगे ये उस वक्त किसी ने सोचा नहीं था। जबलपुर संभाग का दिघोरी गांव तब अविभाजित छिंदवाड़ा जिले का हिस्सा था। दिघोरी के मालगुजार के घर में 2 सितंबर 1924 को हरतालिका तीज पर जन्मे शंकराचार्य के भाई छिंदवाड़ा में पुलिस विभाग में कार्यरत थे। वे मात्र 9 वर्ष की आयु में भैया-भाभी के साथ रहते थे। एक दिन भाभी ने उन्हें गेहूं पिसाने के लिए आटा चक्की भेजा था तब वे खेल-खेल में अनाज पिसाना भूल गए और जब शाम को घर पहुंचे तो भाभी ने उन्हें जमकर डांटा और दो थप्पड़ भी मारे। इससे नाराज होकर वे समीप स्थित राम मंदिर चले गए जहां करपात्री जी महाराज संत समागम में आए हुए थे। इस प्रसंग का जिक्र करने वाले बताते हैं कि यही उनके जीवन परिवर्तन की यात्र का दिन था, क्योंकि वे घर में बिना किसी को बताए रवाना हो गए और करपात्री जी महाराज के साथ रहकर दंड-दीक्षा ली। यहां से उनके शंकराचार्य जीवन की यात्र शुरू हो गई। धर्मग्रंथों को कंठस्थ रखने वाले स्वामी स्वरूपानंद सरस्वति महाराज अकेले ऐसे महात्मा रहे जो आद्य शंकराचार्य द्वारा गठित भारतवंश की दो द्वारका-शारदा पीठ एवं ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य पद को सुशोभित कर रहे थे। संभाग मुख्यालय जबलपुर सहित नरसिंहपुर, सिवनी व छिंदवाड़ा से महाराजश्री का विशेष लगाव रहा।

 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व सदानंद शंकराचार्य मनोनीत

 भू-समाधि स्थल पर महाराजश्री के निज सचिव ब्रम्हचारी सुबुद्धानंद ने घोषणा की कि द्विपीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद जी द्वारा नियुक्त उत्तराधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ(बद्रिकाश्रम) एवं स्वामी सदानंद महाराज को द्वारका शारदा पीठ का शंकराचार्य मनोनीत किया जाता है।

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