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जजर्र सड़क व गड्ढों पर घिरी नगर सरकार, नर्मदा शुद्धिकरण पर सब एकमत

पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रभारी जवाब नहीं दे सके, विपक्ष ने किया हंगामा

जबलपुर। नगर निगम के पं भवानी प्रसाद तिवारी सभाकक्ष में धारा 30 के तहत आहूत बैठक के दूसरे दिन सदन शहर की जजर्र सड़कों व गड्ढों के मुद्दे पर गर्म हो गया। विपक्ष ने नगर सरकार को घेरते हुए जनता की परेशानी बताई और जवाब मांगा। शोर शराबे के बीच पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रभारी एमआईसी सदस्य मनीष पटैल जवाब नहीं दे पाए। भाजपा पार्षद कमलेश अग्रवाल ने पूछा तो प्रभारी की बोलती बंद हो गई। तब मेयर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने मोर्चा संभाला और विपक्ष को गड्ढे भरे जाने संबंधी जानकारी दी। मेयर ने क हा कि जो गड्ढे भरे गए, बारिश के कारण उनकी हालत फिर वैसी ही हो गई। मेयर ने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल अभी पूरे गड्ढे भरे भी नहीं गए। उन्होंने कहा कि फ्लायओवर के नीचे वाले गड्ढों को भरना नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं थी लेकिन फिर भी निगम ने ही गड्ढे भरे। 

 नर्मदा शुद्धिकरण पर सार्थक बहस, सब एकमत

 बरगी विधायक संजय यादव आज फिर नगर निगम सदन में पहुंचे। उन्होंने नर्मदा शुद्धिकरण के लिए नगर सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कहा कि खंदारी नदी देखते ही देखते नाले में तब्दील हो गई। इसके अतिरिक्त जो भी नाले नर्मदा में मिल रहे हैं, उसके दोषी हम सभी हैं। इसके बाद मेयर अन्नू सिंह ने भी नर्मदा शुद्धिकरण का संकल्प दोहराते हुए किए जाने वाले कार्यो को बताया। विपक्ष की ओर से महेश राजपूत ने मेयर से नर्मदा शुद्धिकरण की उस फाइल को सदन पटल पर रखने का निवेदन किया, जिस पर उन्होंने साइन किए । इस बात को लेकर कुछ नोंक-झोंक भी हुई लेकिन अंत में मां नर्मदा को लेकर दोनों पक्ष एकमत हो गए। 

 शहर में होते हुए कमिश्नर की बैठक में अनुपस्थिति दुर्भाग्यपूर्ण

 नगर निगम कमिश्नर आशीष वशिष्ठ के छुट्टी पर जाने की बात को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों ने निंदा की। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शहर में रहते हुए भी निगमायुक्त सदन की पहली बैठक में उपस्थित नहीं हुए, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। मेयर ने कहा कि हड़ताल के दौरान जो भी हुआ वह गलत है, लेकिन इस समय निगमायुक्त को मौजूद रहना चाहिए था। सदन की शुरूआत में ही निगमाध्यक्ष रिंकू विज ने कहा कि मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान के तहत जो शिविर लगाए गए हैं, उनमें किसी भी प्रकार का कोई व्यवधान न आाए इसकी जिम्मेदारी सदन को भी लेनी होगी। क्योंकि यह शिविर गरीबों के लिए लगाया है, जो कि अपनी दिहाड़ी छोड़कर शिविर में पहुंच रहा है। ऐसे में उसे लाभ न मिले तो यह उसके साथ अन्याय होगा।

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