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रसूखदार भू-माफिया के सिंडिकेट ने जेडीए के सिमरिया प्लान में हथियाई करोड़ों की जमीन

एनएच-7 से लगी गांव की जमीन में कागजों की साजिश, नक्शा खुद दे रहा भ्रष्टाचार की गवाही

जबलपुर। सुनियोजित विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले जबलपुर विकास प्राधिकरण की कई योजनाओं में भू-माफिया के खेल ने करोड़ों के वारे-न्यारे कर लिए, अब नेशनल हाइवे से लगे सिमरिया गांव की जमीन खुर्द-बुर्द करने की योजना रसूखदार लोग बना रहे हैं। इस खेल में जेडीए के ही कतिपय अधिकारी भू-माफिया की भूमिका में होने की शिकायत उच्च स्तर पर की गई है। संभाग कमिश्नर एवं जेडीए के चेयरमैन बी चंदशेखर से की गई शिकायत में बताया गया कि अधिकारियों ने पूरे के पूरे प्लान को नियम-कायदों के दांव-पेंच में उलझा कर रसूखदारों को फायदा पहुंचा दिया है। एक चक जमीन के चार खसरों का अवलोकन करने वाले पीड़ित परिवार का दावा है कि 71/1-73/1-73-2 और 73/3 में से खसरा नम्बर 71/1 की भूमि देखने पर यह जानकारी मिली है। यह भूमि एनएच-7 से सटी होने के कारण उन रसूखदारों के जाल में आ गई है जो इससे पहले जमीनों की खरीद-फरोख्त कर सरकारी एप्रोच से सड़क निर्माण कराकर अपनी जमीनों के रेट बढ़वा चुके हैं। 

किसी जमीन को मार्गविहीन, तो कहीं दो-दो रोड बनाने का कुचक्र

. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आपराधिक षड़यंत्र रचकर दुर्भावनापूर्ण आशय से प्राधिकरण के अफसरों ने लेनदेन और रंजिश रखते हुए कुछ रसूखदारों को अनुचित लाभ दे दिया है। इसके लिए पहले शिकायतकर्ता से भी अपेक्षा की गई थी, लेकिन उसने ऊपरी लेनदेन से इंकार कर दिया था। इस कारण नगर विकास योजना क्रमांक टीडीएस-02/जेबीपी/2020 में यह खेल किया जा रहा है। इसमें अनावश्यक रूप से शामिल कर शेष बचे एक चक भूमि के तीन खसरों की भूमि को मार्ग विहीन करने का कुचक्र रचा गया दिखाई दे रहा है। शिकायतकर्ता अजय और विजय कुमार इंदुरख्या ने दावा किया है इस मामले पर उनके पास पूरे साक्ष्य हैं। इंदुरख्या बंधुओं के मुताबिक ग्राम सिमरिया पटवारी हल्का नम्बर 23/77 रैगवां राजस्व निरीक्षक मंडल व तहसील अधारताल में क्रमश: 1.030 हैक्टेयर 0.920 हैक्टेयर 0.410 हैक्टेयर एवं 0.810 हैक्टेयर यानि चारों खसरों की एक चक जमीन जो कि एक दूसरे से लगी हुई 3.170 हैक्टेयर है। इसमें मांगी जा रही राशि नहीं देने के कारण रंजिशवश प्राधिकरण के अधिकारियों ने यह गड़बड़ जानबूझकर की है। इसके लिए 71/1 रकबा की 1.030 हैक्टेयर जमीन को अनावश्यक रूप से योजना में शामिल कर लिया और शेष बची भूमि में पीली लाइन डालकर विभाजित कर दिया। इससे ऊपर वर्णित तीन खसरों की भूमि का पहुंच मार्ग ही समाप्त हो गया । यह भी इसके नक्शे में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

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