पुलिस की दबिश में पकड़े दो गुर्गे, अपार्टमेंट में चल रहा ऑफिस सील
जबलपुर। इंटरनेशनल सटोरिया सतीश सनपाल का पहला संरक्षक और कुख्यात सटोरिया गुरुमुख पुलिस के रडार पर आ गया। खुफिया जानकारी में गुरुमुख मनी लॉड्रिंग का मास्टर माइंड है और शहर के कई रसूखदार लोगों का राजदार है। गोरखधंधे में सतीश सनपाल व मुरली खत्री के साथी गुरमुख आहूजा के ठिकाने पर गोरखपुर पुलिस ने दबिश देते हुए 2 गुर्गो को गिरफ्तार किया है। पुलिस पहुंचने से पहले की कुख्यात सटोरिया गुरमुख आहूजा अपने खास 3 छर्रो के साथ फरार हो गया। गुरमुख और उसके फरार साथियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने रात में करीब आधा दर्जन से अधिक ठिकानों में दबिश दी, लेकिन वे नहीं मिले। खबर है कि गुरमुख और उसके साथी सट्टे की रकम किस खाते में जमा करते थे, पुलिस इसका भी पता लगा रही है। जानकारी के मुताबिक दुबई में रहने वाला सतीश सनपाल ने करीब 15 साल पहले गुरमुख आहूजा के अंडर में सट्टे का कारोबार शुरू किया था।
दया सिंधी, कमल खत्री, कमल मालानी की तलाश तेज
गोरखपुर थाना प्रभारी शिवेश सिंह बघेल के निर्देश पर रामपुर चौकी प्रभारी गणोश तोमर ने मुखबिर की सूचना पर इंदिरा मार्केट में दबिश दी तो वहां गुप्तेश्वर निवासी अखिल चावला को दबोचा गया, उसके पास से 16000 रु पए नगद और मोबाइल फोन जप्त हुए हैं। वहीं पुलिस को यह पता चला कि गोरखपुर गुरु द्वारे के पीछे रहने वाला समीर पोपटानी भी बुकी के लिए काम करता है। पुलिस ने समीर पोपटानी के पास से एक मोबाइल और लैपटॉप बरामद किया। पुलिस ने जब उसके लैपटॉप की जांच की तो उसमें करोड़ों रु पए के क्रि केट सट्टे का हिसाब भी मिला। गुरमुख आहूजा समीर को सट्टा बुक करने के लिए प्रतिमाह 12 से 15 हजार रु पए देता था। अखिल और समीर को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस की टीम गुरमुख आहूजा, दया सिंधी, कमल खत्री और कमल मालानी की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। गोरखपुर पुलिस ने गुरमुख आहूजा का रामपुर स्थित अपार्टमेंट में संचालित ऑफिस को सील कर दिया है। ऑफिस यूनिफाइड वेब ऑप्शन के नाम से संचालित हो रहा था। सूत्रों के मुताबिक गुरमुख आहूजा और उसके साथियों ने शहर में करोड़ों रुपए की प्रापर्टी गोराबाजार , ग्वारीघाट क्षेत्र एवं इन्कम टैक्स चौराहे के पास खरीदी हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल गतिविधियां, होंगे कई खुलासे
मनी लॉन्ड्रिंग करने के कई तरीके हो सकते हैं जिनमे सबसे अहम है ‘फर्जी कंपनी बनाना’ जिन्हें ‘शैल कंपनियां’ भी कहा जाता है। शैल कंपनियां वास्तविक कंपनी की तरह एक कम्पनी होती है, लेकिन वास्तव में इसमें कोई संपत्ति नहीं लगी होती और न ही इनमें वास्तविक रूप में कोई उत्पादन कार्य होता है। ये शैल कंपनियां केवल कागजों पर ही अस्तित्व में होती हैं। लाउन्डरर इन कंपनियों की बैलेंस शीट में बड़े-बड़े लेन-देन को दिखाकर,कंपनी के नाम पर लोन लेता है। पुलिस के रडार पर आए गुरमुख आहूजा को गोरखधंधे में कई बड़े खुलासे होंगे।
