कलेक्टरों को दिया मॉनीटरिंग का फरमान, एमपी का अनूठा उदाहरण
शहडोल। किसी जमाने में कांग्रेस दिग्गज अजरुन सिंह के मानव संसाधन विकास मंत्री रहते स्कूल बच्चों के बस्ते का बोझ करने की बात शुरू हुई थी जो कालांतर में आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर साकार होती नजर आई। यह अनूठा उदाहरण पेश किया है शहडोल संभाग कमिश्नर राजीव शर्मा के प्रयासों ने, जिनकी मुहिम के अंतर्गत अब स्कूल बच्चों के बस्ते का बोझ उनके वजन से 10 प्रतिशत से ज्यादा न होगा।
कक्षा पहली से 12 वीं तक के बच्चों को बोझ मिलेगी राहत
बच्चों के स्कूल बस्ते का वजन कम करने की मुहिम में शहडोल संभाग प्रदेश के अन्य जिलों से आगे निकल गया है। पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों के बैग का वजन आधा कर दिया गया है। शहडोल संभाग कमिश्नर राजीव शर्मा ने शिक्षा विभाग के साथ मिलकर अगस्त माह की शुरुआत से इस मुहिम को शुरु किया था और स्वतंत्रता दिवस के पहले इसे कार्यरूप में परिणित कर दिया गया है। इसके लिए कमिश्नर ने हर एक सरकारी व निजी स्कूलों में अधिकारियों को भेजा और बच्चों को बुलाकर उनके बैग तौले गए जो कि मापदण्डों से दो या तीन गुना ज्यादा वजन के थे। इसके बाद प्राचार्यो व संचालन समिति को हिदायत दी गई और मुहिम शुरू करने के बाद फिर निरीक्षण किया और बच्चों के बैग का वजन कम कर बच्चों के वजन से 10 प्रतिशत तक निर्धारित किया गया।
केंद्र ने नीति तो बनाई पर सिस्टम में उसे अमल नहीं किया
बताया जाता है कि केंद्र सरकार ने 2020 में पॉलिसी लागू की, जिसमें तय किया गया कि बच्चों के वजन से 10 फीसदी से अधिक बैग का भार नहीं होना चाहिए। हाल ही में राज्य सरकार ने इसके लिए कवायद शुरू की, लेकिन शहडोल ही ऐसा जिला निकला, जहां सफलता मिली। स्वतंत्रता दिवस के पहले शहडोल संभाग में इसे लागू भी कर दिया गया। सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी के बच्चों के बैग नहीं हैं, लेकिन निजी स्कूलों में उनके बैग का वजन एक से दो किलो था, जो बैग रहित हो गए। निजी स्कूलों में जो बैग 7-8 किलो तक थे, उन्हें 5 किलो तक किया गया। कमिश्नर राजीव शर्मा की इस मुहिम में शिक्षा विभाग के अधिकारियों संभागीय संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारियों, डीपीसी,बी ईओ, बीआरसी सबको जुटा दिया गया। संभाग के सभी जिलों में इस नीति को लागू कर दिया गया है। इससे बच्चों को भारी बैग से आजादी मिल गई।
