फर्जी एसएमएस दे रहे सायबर ठगों को अवसर, चौतरफा कट रही जेब
भोपाल। आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे नागरिकों को बिजली कंपनियां गुलाम बना रही हैं। प्रदेश में बिजली का बिल एसएमएस के जरिए भेजने की प्रक्रिया में सायबर ठगों को उपभोक्ता के अकाउंट खाली करने का अवसर दिया जा रहा है। वहीं चौंकाने वाली खबर है कि अब बिजली का रेट भी डीजल-पेट्रोल की तर्ज पर बदलेगा। अंतर केवल इतना होगा कि डीजल-पेट्रोल की दरों में रोजाना बदलाव होता है जबकि बिजली के रेट में हर महीने बदलाव होगा। दरअसल, विद्युत उत्पादन गृहों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन जैसे कोयला, तेल और गैस आदि की कीमतों के आधार पर बिजली दरें तय की जाएंगी। इसकी वसूली उपभोक्ताओं से की जाएगी। इस नए प्रावधान के तहत 2023 की शुरूआत से ही यह प्रक्रिया प्रभावी होने की संभावना है। इसके लिए विद्युत (संशोधन) विनियम 2022 का मसौदा तैयार कर लिय गया है। खबर के मुताबिक संसद में रखे गए विद्युत (संशोधन) विधेयक 2022 की धारा 61 (जी) में भी यह प्रावधान किया गया है कि बिजली कंपनियां पूरी आपूर्ति लागत उपभोक्ताओं से वसूल करेंगी।
पेपर लेस बिजली बिल बना मुसीबत, उपभोक्ता परेशान
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा लागू की गई पेपर लेस बिलिंग प्रणाली उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बनती जा रही है। अभी तक बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस से मिलने वाले बिल के न मिलने और कनेक्शन काटे जाने की परेशानी थी, अब सायबर ठगों ने फर्जी एसएमएस भेजकर उपभोक्ताओं को लूटने का जाल बिछा दिया है। बिजली उपभोक्ताओं को बिल भुगतान के फर्जी एसएमएस मिलने की बात राज्य के उर्जा मंत्री प्रद्युम्मन सिंह तोमर ने भी मानी है और बिजल कंपनी को फर्जी एसएमएस से सावधान रहने की अपील तक जारी करना पड़ी। साइबर ठग उपभोक्ताओं को बिल जमा न होने का मैसेज भेजकर उन्हें अपने जाल में फसाकर उनका अकाउंट खाली कर रहे हैं। फर्जी मैसेज भेजकर ठगी करने के केस संस्कारधानी से लेकर राजधानी तक इतने बढ़ गए हैं कि ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्मन सिंह तोमर को खुद उपभाक्ताओं से फर्जी एसएमएस से सावधान रहने की अपील करनी पड़ी। उन्होंने उपभोक्ताओं से कहा कि बिजली बिल जमा करने के लिए यदि किसी नंबर से कॉल आए और कोई एप डाउनलोड करने कहा जाए तो स्मार्ट बिजली एप के अतिरिक्त अन्य कोई एप डाउनलोड न किया जाए। वहीं उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन पर बिल जमा न होने का मैसेज मिलने के बाद उपभोक्ता कनेक्शन कटने के भय से उस पर विश्वास कर लेता है और ठगी का शिकार बन जाता है। लोगों का कहना है कि वे किस एसएमएस पर विश्वास करें और किसे इग्नोर करें, ये समझ नहीं आ रहा है।
स्पॉट बिलिंग भी ठेका कंपनी कराती थी
पूर्व में निजी कंपनी के माध्यम से स्पॉट बिलिंग कराई जाती थी। इस प्रक्रिया के तहत मीटर रीडर हर माह घर आता था और रीडिंग कर तत्काल ही बिल उपभोक्ता को सौंप देता था। अब पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पेपरलेस बिलिंग के जरिए प्रक्रिया को जटिल कर दिया गया है। इस प्रोसेस में मीटर रीडर सिर्फ रीडिंग लेकर जाता है और बिल मोबाइल फोन में एसएमएस के माध्यम से आता है। बिना पढ़े लिखे लोगों को यह प्रक्रिया समझ भी नहीं आ रही है और उन्हें बिजली ऑफिस जाकर बकायदा शुल्क अदा कर मेन्यूअल बिल प्राप्त करना पड़ रहा है। पढ़े लिखे लोग भी साइबर ठगों के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गवा रहे हैं। लोगों का कहना है कि भले ही बिल में 2 रुपए अधिक लिए जाएं, लेकिन मीटर रीडिंग और बिल देने की प्रक्रिया चालू होना चाहिए। हालांकि ये काम भी निजी ठेका कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा है।
