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‘‘गुलाम’’ हुए कांग्रेस से ‘‘आजाद’’, 5 पेज के इस्तीफे में लिखा-अनुभवहीन, चापलूसों का ग्रुप बन गई पार्टी

सरकार का अध्यादेश फाड़कर राहुल ने की थी बचकानी हरकत

 नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी का साथ और हाथ छोड़ दिया है। कांग्रेस के सभी पदों और सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही उन्होंने अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को 5 पेज का इस्तीफा भेजते हुए लिखा है कि दुर्भाग्य से कांग्रेस पार्टी में जब राहुल गांधी की एंट्री हुई और जनवरी 2013 में जब आपने उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया, तब उन्होंने पार्टी के सलाहकार तंत्र को पूरी तरह से तबाह कर दिया। राहुल को पद मिलने के बाद सभी वरिष्ठ व अनुभवी नेताओं को साइडलाइन कर दिया गया और पार्टी में अनुभवहीन व चापलूसों का नया ग्रुप तैयार हो गया और वहीं पार्टी चला रहा है। उन्होने कहा कि सरकार का अध्यादेश सबके सामने फाड़ने की बचकानी हरकत कर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पद के औचित्य को समाप्त कर दिया था।

 जानिए ...5 पेज में क्या लिखा गुलाम नबी ने

 मैंने 1970 के मध्य जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस तब ज्वाइन की, जब इस पार्टी के इतिहास को देखते हुए इससे जुड़ना गलत माना जाता था। इन सबसे प्रभावित हुए बिना, छात्र जीवन से ही मैं आजादी की अलख जगाने वाले गांधी, नेहरू, पटेल, अबुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रभावित था। संजय गांधी के कहने पर मैंने 1975-76 में जम्मू-कश्मीर यूथ कांग्रस की अध्यक्षता संभाली। कश्मीर यूनिविर्सटी से पोस्ट ग्रैजुएशन के बाद 1973-75 तक मैं कांग्रेस के ब्लॉक जनरल सेक्र ेटरी का जिम्मा भी संभाल रहा था। 1977 के बाद संजय गांधी के नेतृत्व में यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्र ेटरी के पद पर रहते हुए मैं हजारों कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ एक जेल से दूसरी जेल गया। तिहाड़ जेल में मेरा सबसे लंबा समय 20 दिसंबर 1978 से जनवरी 1979 तक था। तब मैंने इंदिरा गांधी जी की गिरफ्तारी के खिलाफ जामा मस्जिद से संसद भवन तक विरोध रैली निकाली थी।

 युकां अध्यक्ष रहते राजीव गांधी को शामिल करने का सौभाग्य मिला

. हमने जनता पार्टी की व्यवस्था का विरोध किया और उस पार्टी के कायाकल्प का रास्ता बनाया, जिसकी नींव 1978 में इंदिरा गांधी जी ने रखी थी। 3 साल के महान संघर्ष के बाद 1980 में कांग्रेस पार्टी दोबारा सत्ता में लौटी। संजय गांधी की दुखद मृत्यु के बाद 1980 में मैं यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बना। प्रेसिडेंट रहते हुए मुङो आपके पति राजीव गांधी को यूथ कांग्रेस में नेशनल काउंसिल मेंबर के तौर पर शामिल करने का सौभाग्य मिला। 1981 में कांग्रेस के स्पेशल सेशन के दौरान राजीव गांधी यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए। यह भी मेरी ही अध्यक्षता में हुआ। 1982 से इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरिसम्हा राव और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में मैंने केंद्रीय मंत्र के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। 1980 के मध्य से हर कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मुङो पार्टी में महासचिव के तौर पर काम करने का मौका भी मिला। मैं राजीव गांधी के कांग्रेस पार्लियामेंट्री बोर्ड का अध्यक्ष बनने से लेकर उनकी दुखद हत्या तक सदस्य रहा। इसके बाद नरिसम्हा राव के समय भी ये जिम्मेदारी तब तक संभाली, जब तक अक्टूबर 1992 में उन्होंने इसे पुनर्गठित करने का फैसला नहीं कर लिया। मैं ये सब इसलिए गिना रहा हूं ताकि इस महान संस्था में दिए गए मेरे योगदान को देख लिया जाए। राज्यसभा में मैंने लीडर ऑफ अपोजिशन के तौर पर 7 साल तक काम किया। मैंने अपनी सेहत और अपने परिवार को दांव पर रखते हुए, अपने जीवन का हर लम्हा कांग्रेस की सेवा में दिया।

 राहुल के पीए और सुरक्षाकर्मी पार्टी के फैसले कर रहे

बेशक कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर आपने यूपीए-1 और यूपीए-2 के गठन में शानदार काम किया। इस सफलता का सबसे बड़ा कारण यह था कि आपने अध्यक्ष के तौर पर बुद्धिमान सलाहकारों और वरिष्ठ नेताओं के फैसलों पर भरोसा किया, उन्हें ताकत दी और उनका ख्याल रखा। दुर्भाग्य से राजनीति में राहुल गांधी की एंट्री और खासतौर पर जब आपने जनवरी 2013 में उन्हें उपाध्यक्ष बनाया, तब राहुल ने पार्टी में चली आ रही सलाह के मैकेनिज्म को तबाह कर दिया। सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को साइड लाइन कर दिया गया और गैरअनुभवी चापलूसों का नया ग्रुप बन गया, जो पार्टी चलाने लगा। सबसे ज्वलंत उदाहरण वह है, जब राहुल गांधी ने सरकार के अध्यादेश को पूरे मीडिया के सामने टुकड़े-टुकड़े कर डाला। कांग्रेस कोर ग्रुप ने ही यह अध्यादेश तैयार किया था। कैबिनेट और राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दी थी। इस बचकाना हरकत ने भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के औचित्य को खत्म कर दिया। किसी भी चीज से ज्यादा यह इकलौती हरकत 2014 में यूपीए सरकार की हार की बड़ी वजह थी। इसके चलते राइट विंग और कारोबारी फायदों का एक गठजोड़ हुआ और उसने एक दुष्प्रचार का कैंपेन चलाया। 2014 में आपकी और उसके बाद राहुल गांधी की लीडरशिप में कांग्रेस शर्मनाक तरीके से 2 लोकसभा चुनाव हारी। 2014 से 2022 के बीच हुए 49 विधानसभा चुनावों में से हम 39 चुनाव हार गए। पार्टी ने केवल 4 राज्यों के चुनाव जीते और 6 मौकों पर उसे गठबंधन में शामिल होना पड़ा। अभी कांग्रेस केवल 2 राज्यों में शासन कर रही है और 2 राज्यों में गठबंधन में उसकी भागीदारी मामूली है। राहुल गांधी ने झुंझलाहट में अध्यक्ष पद छोड़ दिया, उससे पहले उन्होंने कांग्रेस वर्किग कमेटी में हर सीनियर नेता का अपमान किया, जिसने पार्टी के लिए अपनी जिंदगी दी, तब आप अंतरिम अध्यक्ष बनीं। पिछले 3 साल से आप यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अभी भी बुरी बात यह है कि यूपीए सरकार की अखंडता को तबाह करने वाला रिमोट कंट्रोल सिस्टम अब कांग्रेस पर लागू हो रहा है। आप बस नाम के लिए इस पद पर बैठी हैं। सभी जरूरी फैसले राहुल गांधी ले रहे हैं, उससे भी बदतर यह है कि उनके सुरक्षाकर्मी और पीए ये फैसले ले रहे हैं।

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