तीज-त्योहारों पर तिथियों का भ्रम फैलाने चल रही साजिश
जबलपुर। बीते कुछ वर्षो से हिन्दु धर्म के तीज-त्योहारों की तिथियों और मुहूर्त को लेकर कुछ प्रचार माध्यमों द्वारा भ्रम फैलाने की साजिश की जा रही है। भारतीय पंचांग और ज्योतिष विज्ञान इतना समृद्ध है कि उसमें सारे कन्फ्यूजन का समाधान है। प्रकांड ज्योतिष विज्ञानी इंजीनियर अनिल पाण्डेय का कहना है कि तिथियों का भ्रम वे लोग ही फैलाते हैं जिन्हें ज्योतिष ज्ञान नहीं है। हिन्दु धर्मावलम्बियों को अपने समृद्ध ज्योतिष विज्ञान पर ही विश्वास करना चाहिए और रक्षाबंधन पर्व पर भद्राकाल को लेकर की जा रही बातों को नजरअंदाज कर श्रद्धा-आस्था और परंपरागत तरीके से 11 अगस्त को ही रक्षा बंधन पर्व मनाना चाहिए।
हर त्योहार में दान का है विशेष महत्व
पंडित अनिल पाण्डेय ने कहा कि आप किसी भी पंचांग में देखें, इस बार रक्षाबंधन का त्यौहार 11 तारीख को बताया गया है तथा 12 तारीख को दान देने हेतु कहा गया है । ऐसा हमारे सभी त्योहारों में होता है कि जिस दिन त्यौहार है यदि उस दिन आप दान नहीं दे पाए तो उसके अगले भी आप दान दे सकते हैं । रक्षाबंधन का त्यौहार श्रवण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णमासी को श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है । भुवन विजय पंचांग के अनुसार इस वर्ष 11 अगस्त को पूर्णमासी प्रात: काल 9:18 से प्रारंभ हो रही है और 12 तारीख को प्रात: काल 6:59 तक रहेगी । श्रवण नक्षत्र 11 अगस्त को प्रात: काल 6:22 से अगले दिन अर्थात 12 अगस्त को प्रात: काल 4:52 तक है । अत: हम इस बात के लिए विवश हैं कि 11 अगस्त को प्रात: काल 9:18 से अगले दिन 12 तारीख को प्रात: काल काल 4:52 के बीच में रक्षाबंधन का पर्व मनाएं। कलयुग के कुछ महान विद्वानों ने इसमें यह बताया है कि 11 तारीख को 9:23 से प्रारंभ होगी जो कि रात्रि के 8:09 तक रहेगी । भद्राकाल होने के कारण हम इस दिन रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मना सकते हैं। इन विद्वानों से मेरा कहना है कि उनके अनुसार 8:09 के बाद तो भद्रा काल बिल्कुल ही नहीं रहेगा अत: 8:09 के उपरांत रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा सकता है । दूसरी बात यह भी है की 11 अगस्त 2022 की संपूर्ण दिन चंद्रमा मकर राशि में रहेगा, एवं चंद्रमा के मकर राशि में होने से भद्रा का वास इस दिन पाताल लोक में रहेगा। पाताल लोक में भद्रा के रहने से यह अशुभ नहीं है ।। इसलिए पूरे दिन सभी लोग अपनी सुविधा के अनुसार राखी बांधकर त्यौहार मना सकते हैं।
भद्राकाल और राशियों का विवरण
मुहुर्त्त चिन्तामणि के अनुसार जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होता है तब भद्रा का वास पृथ्वी पर होता है। चंद्रमा जब मेष, वृष, मिथुन या वृश्चिक में रहता है तब भद्रा का वास स्वर्गलोक में रहता है। कन्या, तुला, धनु या मकर राशि में चंद्रमा के स्थित होने पर भद्रा पाताल लोक में होती है। भद्रा जिस लोक में रहती है वही प्रभावी रहती है। इस प्रकार जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होगा तभी वह पृथ्वी पर असर करेगी अन्यथा नहीं। जब भद्रा स्वर्ग या पाताल लोक में होगी तब वह शुभ फलदायी कहलाएगी। इसी कारण भारतवर्ष के सभी पंचांग में रक्षाबंधन 11 अगस्त को मनाने के लिए कहा गया है तथा 11 अगस्त या 12 अगस्त को आप दान इत्यादि दे सकते हैं ।
