नहीं थम रहा आरोप-प्रत्यारोप का दौर
ये भी कहा कि व्यवस्था पूरी तरह सड़-गल गई
जबलपुर। भाजपा में चुनाव की विजय-पराजय के बाद परिणामों पर मंथन करने और संगठनात्मक समीक्षा की परिपाटी रही है, लेकिन जबलपुर में मेयर पद का चुनाव हारने के बाद इससे अलहदा हार-जीत की जिम्मेदारी तय करने आरोप-प्रत्यारोप का दौर थम नहीं रहा। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पूर्व मेयर प्रभात साहू और भाजपा महानगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर के घात-प्रतिघात के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साले साहब दीपांकर बेनर्जी की एंट्री हो गई है। दीपांकर की एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें उन्होने संतुलित अंदाज में कहा है कि डॉ जामदार मेयर का चुनाव लड़ने लायक थे ही नहीं। इसमें मेयर प्रत्याशी के विशिष्ट व्यक्तित्व व परिवारिक पृष्टभूमि का जिक्र करते हुए कहा गया है कि नकारात्मक परिणाम पूरे महाकोशल के परिप्रेक्ष्य में चिंतन का विषय हैं। दीपांकर ने कहा है कि राजनीतिक दृष्टि से व्यवस्थाएं पूरी तरह सड़-गल गईं हैं और इसे नहीं सुधारा गया तो आने वाले समय में कई विषमताएं संगठनात्मक दृष्टि से सामने आएंगी।
पराजय की जिम्मेदारी लेने पर उठे सवाल, किसी को नहीं कोई मलाल
मेयर चुनाव में पराजय की जिम्मेदारी लेने के मामले में चल रहे सोशल मीडिया वार में कई तरह के सवाल उठाए गए हैं। किसी को पार्टी की हार का मलाल नहीं है तो कोई चटखारे लेकर कमेंट्स करने में जुटा है। पूर्व मेयर प्रभात साहू और महानगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर के आरोप-प्रत्यारोप का जाहिर मामला संगठन में उच्च स्तर तक पहुंच गया है। कुछ वरिष्ठ नेताओं की समझाइश के बाद भी कार्यकर्ता सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर खुल कर लिख रहे हैं। जब जीएस ठाकुर और उनके समर्थकों ने संगठन की बदौलत 44 वार्डो में जीत का दंभ भरा तो पूर्व मेयर प्रभात साहू की यह टिप्पणी जमकर चर्चा में आ गई जिसमें उन्होने लिखा- वाह रे..मीठा-मीठा गप, कड़वा कड़वा थू ..डॉ जामदार जी कैसे हार गए कौन जिम्मेदारी लेगा? इसके जवाब में जीएस ठाकुर ने लिखा कि आप बड़े नेता महाकौशल,महापौर जैसे बड़े दायित्व का निर्वहन कर चुके है,इस चुनाव में भी आपकी भूमिका तय थी,अपने जिले,अपनी विधान सभा,अपने वार्ड,आत्म चिंतन की आवश्यकता है। आप गिराना किसे चाहते है,व्यक्ति तो गौड़ होता है ! जिस पार्टी ने दशकों आपको सिर पर उठाकर रखा पार्टी के प्रति आपका दायित्व कुछ नहीं ? आखिर आप जैसे बड़े नेता की खीज किससे है ? बड़े भाई आपका यह आचरण व्यवहार सोशल मीडिया पर आपको क्षणिक वाहवाही दे सकता है,किंतु यह मर्यादित नहीं है...आदि आदि। वहीं ठाकुर की इस टिप्पणी से साहू समर्थक नाराज हो गए जब यह लिखा गया कि गोविंद बल्लभ पंत वार्ड में दूसरी बार भाजपा पार्षद हारा ,इस बार महापौर प्रत्याशी 1490 वोट से पीछे हुआ । इसकी जवाबदेही किस पर ??? इस तरह भाजपा नेता और उनके समर्थकों द्वारा की गई टिप्पणी से सोशल मीडिया में जबरदस्त वार चल रहा है। ज्यादातर सवाल उठा रहे हैं कि जब 44 वार्ड जीते जा सकते हैं तो मेयर का चुनाव क्यों नहीं जीता जा सकता।
सांसद राकेश सिंह की सक्रियता पर भी किए गए वार
जबलपुर में मेयर चुनाव हारने की बात, संगठन स्तर किए गए प्रयास और बड़े नेताओं की सक्रियता पर उठाए गए सवाल भी सोशल मीडिया पर जमकर उछल रहे हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह की सक्रियता का मापदंड क्या रहा? मुख्यमंत्री की सिविक सेंटर सभ, रोड शो और मेयर के लिए जनसंपर्क में सांसद ने रस्म अदायगी क्यों की? पार्टी के जीतने वाले पार्षदों की संख्या ने कई सवाल दबा दिए, वरना पार्षद टिकट को लेकर की गई कई साजिशों से पर्दा उठ जाता। पार्टी के अंदरखानों में चर्चा है कि संभागीय चयन समिति में तय नामों की सूची (अधूरी)अधिकृत तौर पर घोषित होने से पहले सोशल मीडिया में कैसे वायरल हो गई। समिति के संयोजक ओम प्रकाश धुव्रे के हस्ताक्षर के बाद एक रात सूची को किसने अपने पास रखा? और कैसे उसमें तय नाम बदले गए, ये अभी समीक्षा बैठक में सामने आएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक ये भी सामने आएगा कि किसने वार्डो में जाकर बोला कि पार्षद को चुनाव जिताने में दम लगाओ, महापौर को छोड़ो। ऐसा माना जा रहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी है, इसलिए संगठन स्तर पर कार्यकर्ताओं को चुप रहने की नसीहत दी जा रही है।
