एमपी स्टूडेंट यूनियन के गंभीर आरोप, पेपर लीक कराना योजना का हिस्सा
जबलपुर। राज्य की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी (एमयू) के जिम्मेदारों पर पेपर लीक कराने और निजी मेडिकल कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रेस कांफ्रेंस में एमपी स्टूडेंट यूनियन ने कहा कि मेडिकल यूनिवर्सिटी में परीक्षा नियंत्रक, सहायक कुलसचिव और एसोसिएट प्रोफेसर इस पूरे मामले में लिप्त हैं और उच्च स्तरीय जांच में साबित हो जाएगा कि व्यापमं जैसे सारे घपले-घोटाले करोड़ों रुपए लगाकर निजी मेडिकल कॉलेज खोलने वालों के हित साधने किए गए हैं। यूनियन के अध्यक्ष अभिषेक पांडे ने मीडिया से कहा कि सहायक कुलसचिव, परीक्षा कंट्रोलर के साथ मिलकर मॉडरेटर ने गोपनीय पेपर को लीक किया। यूनियन द्वारा की गई शिकायत पर प्रभारी कुलसचिव व संभाग कमिश्नर बी. चंद्रशेखर ने रतलाम के केंद्राध्यक्ष पर सख्त कार्रवाई की और एमयू में पदस्थ मॉडरेटर को छुट्टी में होने के बाद भी पेपर सेट करने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
परीक्षा नियंत्रक का गायब होना ही पेपर लीक का प्रमाण
एमपी स्टूडेंट यूनियन ने एमयू में पदस्थ अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि 10 जून 2022 को बीएएमस के एनाटॉमी विषय का पेपर सुबह 11:00 बजे से 2:00 बजे दोपहर के बीच तक होना था। इस पेपर को परीक्षा नियंत्रक डॉ. सचिन कुचया ने डॉक्टर निधि श्रीवास्तव से सेट करवाया। पेपर सेट करने वाला कभी भी प्रश्न पत्र का मॉडरेशन नहीं करता। बावजूद निधि श्रीवास्तव को ही एनाटॉमी विषय के पेपर का मॉडरेटर नियम विरु द्ध बनाया गया। यूनियन ने बीएएमएस की एनाटॉमी की परीक्षा को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि 10 जून 2022 को जो पेपर 11:00 बजे से शुरू होना था। उसे जानबूझकर 11:20 पर प्रारंभ किया गया। यही नहीं, परीक्षा शुरू होने के पहले ही तकरीबन 10:30 बजे डॉ. निधि श्रीवास्तव स्ट्रांग रूम से गायब हो गई, जबकि नियमानुसार पेपर प्रारंभ होने के आधे घंटे तक उनका रु कना अनिवार्य होता है। ऐसे में समझा जा सकता है कि उनके द्वारा ही पेपर आउट किया गया है। अभिषेक पांडे ने दावा किया कि रतलाम के निजी मेडिकल कॉलेज में दोपहर डेढ़ बजे पेपर शुरू कराया गया, यहां पहले ही पेपर लीक हो चुका था। पांडे ने परीक्षा को लेकर खुलासा किया है कि इसमें न सिर्फ गंभीर अनियमतिताएं हैं, बल्किअवकाश के बावजूद भी कर्मचारी स्ट्रांग रूम में पेपर मॉडरेटर और परीक्षा केंद्र ऑब्जर्वर का काम करता है। यूनियन ने गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।