माढ़ोताल पुलिस ने आरोपियों को भेजा जेल
जबलपुर। पत्नी और साले की प्रताड़ना से तंग होकर आत्महत्या करने के मामले में माढ़ोताल पुलिस ने प्राथमिक जांच करते हुए पत्नी शिल्पी तिवारी और साले प्रवीण पाठक के विरूद्ध 306, 34 का अपराध पंजीबद्ध कर दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। वहीं मृतक के पास मिले सुसाइड नोट में उसने लिखा कि उसकी प्रापर्टी का हकदार बेटा होगा और उसकी परवरिश चाचा करेगा। टीआई रीना पांडे शर्मा ने बताया कि कस्तूरी सिटी ग्राम रैगवां निवासी महेंद्र तिवारी ने 8 जून को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। प्राथमिक पूछताछ में मृतक के छोटे भाई रवींद्र तिवारी ने पुलिस को बताया कि गांव बढ़ैयाखेड़ा में भागवत कथा आयोजन होने के बाद 8 जून को भाई महेन्द्र तिवारी, भाभी शिल्पी तिवारी एवं भतीजा पार्थ अपने घर कस्तूरी सिटी जाने के लिए रात लगभग 8 बजे टू व्हीलर से निकले थे। रात करीब 9:30 बजे भतीजे पार्थ तिवारी ने फोन पर बताया कि पापा ने पंखे से फांसी लगा ली है। रवींद्र तिवारी परिजनों के महेन्द्र तिवारी के घर पहुंचा जहां देखा भाई महेन्द्र पंखे से फांसी पर मृत अवस्था में लटके थे।
किराए का मकान खाली कर पत्नी को भेजा जाए मायके
आत्महत्या करने से पहले मृतक महेंद्र तिवारी ने जो सुसाइड नोट लिखा था, पुलिस ने उसका भी विधिवत परीक्षण करा लिया है। सुसाइड नोट में मृतक महेंद्र तिवारी ने लिखा कि मैं अपनी पत्नी शिल्पी और साले प्रवीण पाठक की प्रताड़ना से तंग होकर आत्महत्या कर रहा हूं। कानून से मेरी गुजारिश है कि मेरे न रहने के बाद मेरी जायदाद का हकदार मेरा पुत्र पार्थ तिवारी होगा, जब वह 22 साल का हो जाएगा। पार्थ का चाचा रवींद्र उसकी परवरिश करेगा, तब तक मेरी संपूर्ण संपत्ति की देखरेख छोटा भाई रवींद्र करेगा। पुलिस से अनुरोध है कि मैं जिस किराए के मकान में रहता हूं, उसे खाली कराकर पत्नी को उसके मायके भेज दिया जाए। बेटे पार्थ की पढ़ाई पूरी होने तक उसे अपने चाचा रवींद्र तिवारी के साथ रहने दें, क्योंकि पार्थ को भी जान से मारने की धमकी दी जाती रही है। चाहे तो कोई भी व्यक्ति पार्थ से अकेले में इस संबंध में पूछताछ कर सकता।
बयान में प्रताड़ना की बात आई सामने
मर्ग जांच में मृतक के परिजनों ने पुलिस को बताया कि महेन्द्र तिवारी अपनी पत्नी शिल्पी तिवारी एवं साले प्रवीण पाठक से परेशान था। शिल्पी तिवारी आए दिन लड़ाई झगड़ा कर मानिसक रूप से प्रताड़ित करती थी एवं प्रवीण पाठक अपनी बहन शिल्पी का सहयोग करते हुए जीजा महेंद्र को धमकाता था। दोनों की अधिक प्रताड़ना से तंग आकर महेन्द्र तिवारी ने आत्महत्या कर ली थी।
