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नेता प्रतिपक्ष कमलेश अग्रवाल और अध्यक्ष पद के लिए अर्चना सिसोदिया का नाम आगे

मेयर चुनाव हारने के बाद सदन में परफार्मेस के लिए भाजपा की कवायद 

जबलपुर। लाल बिल्ंिडग यानि नगर निगम के पं भवानी प्रसाद तिवारी सभाकक्ष में 21 वें मेयर के रूप में कांग्रेस के जगत बहादुर सिंह अन्नू 23 साल बाद नगर सत्ता की बागडोर संभालें, उसके पहले निगम प्रशासन ने सभाकक्ष की खस्ता हालत सुधारने का काम लगभग पूरा कर लिया है। यहां सभापति यानि सदन के अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन बैठेगा और नगर सत्ता को चुनौती देने वाला नेता प्रतिपक्ष कौन होगा? इस पर मंथन शुरू हो गया है। मेयर चुनाव में पराजित होकर भी सदन में बहुमत हासिल करने वाली भाजपा में इन दो महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने चुनाव परिणाम आने के बाद ही भाजपा में कवायद शुरू हो गई है। भाजपा सूत्रों की मानें तो मेयर पद के दावेदार रहे कमलेश अग्रवाल त्रिकोणीय संघर्ष में चुनाव जीतकर नेता प्रतिपक्ष पद के प्रबल दावेदार बन गए हैं, वहीं अध्यक्ष पद के लिए उच्च शिक्षित महिला और दादा ठनठन पाल वार्ड की विजेता पार्षद अर्चना सिसोदिया का नाम आगे है। 

 दावेदार कई, लेकिन भाजपा संगठन में मंथन

 नगर निगम अध्यक्ष के लिए भाजपा में इस बार अनुभवी पार्षदों कमी मानी जा रही है, लेकिन एक बार फिर चुनकर आए रिंकू विज और लवलीन आनंद की दावेदारी बनने के पहले अर्चना सिसोदिया का नाम प्रदेश नेतृत्व से आने की खबर है। दरअसल, अर्चना को पार्षद की टिकट दिलाने में एक मंत्री का दबाव रहा और उनके खिलाफ जबलपुर के ही एक कद्दावर नेता ने 2 निर्दलीय प्रत्याशी को खड़ा कर उनकी राह में बाधा डाली थी, फिर भी वे सर्वाधिक 12 प्रत्याशियों वाले वार्ड से निर्वाचित हो गईं। उच्च शिक्षित अर्चना सिसोदिया को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं तीन बार के पार्षद कमलेश अग्रवाल ने अध्यक्ष बनने में दिलचस्पी नहीं दिखाई बल्कि वे सदन में धारदार विपक्ष के लिए नेता प्रतिपक्ष की दावेदारी कर रहे हैं, इसलिए भाजपा इस पर मुहर लगा सकती है। 

अन्नू की मेयर इन कांउसिल में होंगे युवा चेहरे

 चुनाव के नतीजे आने के बाद विजेताओं ने बिना देर किए एमआईसी मेंबर बनने की कवायद शुरू कर दी है। कुछ प्रत्याशियों को तो पहले ही आश्वासन मिल चुका था, लेकिन जिन्होंने धुरंधरों को हराकर चुनाव जीता वे भी एमआईसी सदस्य बनने दावेदारी कर रहे हैं। नगर निगम सदन में इस बार सबसे ज्यादा युवा सदस्य होंगे। इसलिए माना जा रहा है कि एमआईसी भी युवा ही होगी। कांग्रेस के कई दिग्गज व पूर्व पार्षदों जैसे द्वारका मिश्र, केवल कृष्ण आहूजा, नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर की भाभी लता सोनकर को पराजय का मुंह देखना पड़ा है। ऐसे में मेयर इन काउंसिल में कई चेहरे ऐसे होंगे जो पहली बार चुनाव जीतकर आए हैं। एमआईसी में महिलाओं की हिस्सेदारी भी बराबर की आंकी जा रही है। नगर निगम सदन में कांग्रेस भले ही सत्ता में रहेगी, लेकिन विपक्ष का सामना करने अनुभवी पार्षदों की कमी खलेगी।

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