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खूबियों-खामियों का खाता:- अन्नू को चुनाव लड़वाना नहीं आता, जामदार खेमे में फील-गुड ज्यादा

जनता बोले मन की बात-कार्यकर्ता बोले पार्टी की बात

दोनों में है असंतुष्टों की जमात 

जबलपुर। नगरीय निकाय चुनाव में चरमोत्कर्ष पर पहुंचे प्रचार अभियान और अंतिम दौर में पहुंची राजनीतिक दलों की रणनीति के बीच ‘ virabhadr.com  ’ ने प्राइवेट जासूस एजेंसी ‘डेल्टा डिटेक्टिव सर्विस’ ( DDS) के जरिए सभी 79 वार्डो में यह जानने की कोशिश की है कि वोटर का मूड क्या है, यह समझने की कोशिश की है कि प्रत्याशी चयन में किस पार्टी ने चूक की और किस पार्टी ने परिजनों को टिकट से नवाजा,यह पड़ताल करने की कोशिश की है कि शहर विकास के मुद्दे पर किसका दावा जनता के गले उतरा और जनता का मन टटोलने का प्रयास किया कि उसे मेयर और पार्षद चुनने में क्या पसंद है। शाश्वत सत्य ये है कि ‘वोटर के मन की बात जानना किसी के बस की बात नहीं है’, लेकिन चुनावी माहौल में नतीजों की तरफ इशारा करते वोटर कुछ न कुछ जरूर कहते हैं। DDS  का ये सर्वे किसी  की जीत का ऐलान नहीं है और न ही किसी की पराजय का दावा है, लेकिन स्थानीय मुद्दों पर अब मुखर हो चली जनता क्या निर्णय करने जा रही है, सर्वे इसकी प्रतिध्वनि जरूर सुना सकता है। 

 न वोट परसेंटेज का गणित, न वोट शिफ्टिंग का अनुमान

 चुनावी सर्वे  में अधिकांशत: बीते चुनाव के आंकड़े और वोट पर्सेटेज का हिसाब लगाया जाता है, वहीं विश्लेषक राजनीतिक दलों के लिए होने वाली वोट शिफ्टिंग  का आंकलन करते हैं। DDS की टीम ने चार, छ: आठ-दस लोगों के समूहों के बीच होने वाली चर्चा और पार्टी कार्यकर्ताओं के आपसी मंथन के बीच गोपनीय तरीके से उनकी बातों का निचोड़ निकाला है। मुख्य प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारी हों या मैदानी कार्यकर्ता, उनमें चुनाव प्रचार की शुरूआत से ही टिकट वितरण को लेकर अनुमान लगाए जाने लगे थे। इस विषय की पड़ताल में जो निष्कर्ष समझ आया उसमें प्रत्याशी चयन को लेकर सबसे ज्यादा असंतोष भाजपा में दिखा, वहीं कांग्रेस में टिकट वितरण की जो परंपरा है उसे बदलने की बातें जरूर की गईं, लेकिन अंतत: टिकट उन्हें ही मिली जिन्हें दमदार नेताओं का संरक्षण रहा। फिलहाल सर्वे  रिपोर्ट के खास बिंदुओं पर फोकस मेयर चुनाव को लेकर है, जिसमें एक तरफ भाजपा प्रत्याशी डॉ जितेंद्र जामदार का चुनाव अभियान है और सामने कांग्रेस प्रत्याशी जगत बहादुर सिंह अन्नू का नाम है।

 किसका विश्वास रहेगा कायम, किसकी खामी करेगी नुकसान

फील-गुड * :- मेयर की कुर्सी के लिए इस बार का चुनाव एकतरफा नहीं है, यह कहने वालों में कैडर पर भरोसेमंद भाजपा के रणनीतिकार और जमीनी कार्यकर्ता भी शामिल  हैं। शुरूआती दौर में पहले प्रत्याशी घोषित होने का फायदा कांग्रेस के जगत बहादुर सिंह अन्नू ने उठाया, लेकिन कुशल चुनावी रणनीति में माहिर भाजपा ने बूथ लेवल के प्रचार अभियान को गति देकर काफी कुछ हासिल करने की कोशिश की और अपनी प्रतिष्ठा से जुड़ा मानकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने चुनाव प्रचार में खासा समय देकर पार्टी में उत्साह भरा। ये कवायद पार्टी के मैदानी कार्यकर्ताओं पर कितना असर डाल सकी, ये तथ्य अंदरखानों की पड़ताल में चौंकाने वाला है। भाजपा में टिकट वितरण से उपजा असंतोष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। अधिकांशत: बल्कि अब तक नाराजी कुछ दिनों बाद खत्म होने की परंपरा कम से कम भाजपा में तो जीवित रही है, लेकिन इस चुनाव में स्थिति उलट है। भाजपा में 13 प्रत्याशियों को बगावत की सजा देने (1 पार्षद पद के प्रत्याशी के पति,1 पूर्व पार्षद के पति मिलाकर 15) की नौबत आई और इन बागियों में कई अपने वार्ड में चुनाव नतीजे प्रभावित करने की स्थिति में हैं और कई जीतने लायक माने जा रहे हैं। 79 वार्डो में 26 वार्ड ऐसे हैं जहां असंतुष्टों के कारण मेयर पद के लिए बनी रणनीति गड़बड़ा रही है। वहीं पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मन टटोलने पर ये बात सामने आई कि डॉ जामदार की स्वीकार्यता संगठन में भले ही हो गई पर उनके लिए बने माहौल में ‘फील-गुड’ ज्यादा है। पार्टी ने जिन नेताओं को पार्षद का टिकट दिया,उनके नजदीकी समर्थक चुनाव अभियान में उनके लिए सक्रिय हैं, लेकिन भाजपा का मंडल और बूथ स्तर का वो कार्यकर्ता निष्क्रिय है जिसके सामने पार्टी का ‘क्राइटऐरिया’ आ जाता है। वर्षो संगठन में कार्य करने वाले उम्रदराज नेता या वो मंडलों के पदाधिकारी जिनकी वरिष्ठता का सम्मान कर उनके एक आदेश पर नाराज कार्यकर्ता जुट जाते थे, वो ही कह रहे हैं कि भाजपा में ‘फील-गुड’ ज्यादा है।

 संगठन की खामी * :- कांग्रेस प्रत्याशी जगत बहादुर सिंह अन्नू के चुनाव अभियान की स्वीकार्यता शहर में जाहिर हो गई, पर अन्नू को चुनाव लड़वाना नहीं आता, ये कहने वाले इसका तात्पर्य बताते हैं कि अन्नू चुनाव दमदारी से लड़ रहे, पर उन्हें चुनाव लड़वाने वाला संगठन खामियों से भरा है। चुनाव अभियान के रणनीतिकारों यानि अन्नू के करीबियों का उत्साह इसलिए भी बढ़ा है कि शुरुआती माहौल से चरम पर पहुंचे प्रचार अभियान तक की स्थिति में अन्नू को बेहतर प्रत्याशी कहने वालों में भाजपा के असंतुष्ट व समर्थित वोटर भी शामिल हैं। पार्टी टिकट मिलते ही सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों में पैठ बनाने के साथ ही अन्नू ने शहर विकास की प्रतिबद्धता में जो बातें कहीं, उनका जमीनी हकीकत से काफी कुछ लेना-देना है और नगर निगम की राजनीति में वर्षो की सक्रियता उनके काम आ रही है। बस, कमी इस बात की है कि भाजपा के पन्ना प्रभारी से लेकर बूथ और मंडलों में जिम्मेदारी संभालने वालों की फेहरिश्त के मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी जगत बहादुर सिंह अन्नू के पास संगठन की ताकत कम,अपना खुद का ‘औरा’ ही ज्यादा है। नगर कांग्रेस अध्यक्ष वे (अन्नू) खुद हैं और निवृतमान नगर अध्यक्ष बेटे के चुनाव की बागडोर संभाले हैं। कांग्रेस में पार्षद टिकट वितरण को लेकर भाजपा के मुकाबले असंतोष कम है, लेकिन जो विरोध है वो अधिकृत प्रत्याशी को निपटाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। कांग्रेस के चुनाव लड़ चुके और पार्षद रह चुके कई नेता ऐसे हैं जिन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई और ये बात चुनाव अभियान की कमान संभालने वाले सांसद विवेक तन्खा तक पहुंच चुकी है। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी की महीनों पहले की हाईटेक तैयारी का ही हिस्सा है कि चारों शहरी विधानसभा के साथ ही दो वार्डो की सीमा से लगे बरगी और पनागर विधानसभा क्षेत्र के बूथों पर बैठने वाले कार्यकर्ताओं की सूची उनके पास है, उन्हें ‘एक्टिव मोड’ में लाने की कवायद बाकी है।

 भाजपा में रूठों को मनाने में ‘अड़ंगे ’ पर अड़ंगे

 पार्टी टिकट वितरण से तैयार चुनाव की रणनीति का शुरुआती दौर ही भाजपा में विवादों से घिरा रहा। पार्षद टिकट देने में किसकी चली और किसने मनमानी नहीं होने दी, ये बात जमीनी कार्यकर्ताओं में कहीं आक्रोश के साथ हो रही है तो कहीं चटखारे लेकर बताई जा रही है। हालांकि वोटिंग की तारीख नजदीक आने पर टिकट की  बात बेमानी कही जा सकती है, लेकिन इसके निहितार्थ भाजपा के जीत के रथ को रोकने का मायना  कही और बताई जा रही है। चयन समिति की बैठक में पूर्व मेयर प्रभात साहू अकेले सदस्य थे जिन्होने अलग-अलग क्षेत्रों के वार्ड से सिर्फ सिंगल नाम आने का विरोध किया और संगठन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत चहेतों के तीन-तीन नाम का पैनल बैठक में रखे जाने पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ,सांसद राकेश सिंह सहित शहरी विधानसभा सीट पर पराजित दो नेताओं शरद जैन व अंचल सोनकर ने अपने चहेतों को टिकट दिलाने में कामयाबी हासिल की,वहीं पश्चिम से पराजित हरेंद्रजीत सिंह बब्बू की पसंद को नजरअंदाज किया गया और साफ है कि पश्चिम के 19 वार्डो में से एक भी टिकट उनके समर्थक को नहीं मिली। एक-एक टिकट मंत्री गोपाल भार्गव व सिसोदिया के परिवार में गई है । पार्टी में रूठों को मनाने का जतन पूरी तरह दरकिनार किया गया। संगठन से जुड़े और चुनाव में पर्ची बांटने तक की जिम्मेदारी संभालने कार्यकर्ताओं में चर्चा रही कि नाराज कार्यकर्ता-नेताओं को मनाने में  अड़ंगेबाज नेताओं की भूमिका रही। उत्तर मध्य के एक वार्ड में बागी प्रत्याशी को नामांकन वापस न लेने की खुड़पेच लगाकर एक दमदार प्रत्याशी के लिए परेशानी खड़ी करना पार्टी में ही चर्चा का विषय है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बूथों के डिजिटिलाइजेशन में मप्र को देश में आगे कर कुशल रणनीति का खाका खींचा था, लेकिन अड़ंगेबाज नेताओं ने उस पर पानी फेरने में कसर नहीं छोड़ी। यही वजह है कि 13 वार्डो में बागी प्रत्याशी भाजपा के विजय अभियान में रोड़ा बने हैं। 

कांग्रेस में सिर्फ विधायकों की चली, लखन की दूसरे विधानसभा क्षेत्र में भी

कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के सिर पर मौजूदा विधायकों का ही हाथ है और विधायकों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की जिम्मेदारीभरी चेतावनी सवार है, जिसमें उन्होने दो टूक कहा है कि प्रत्याशी चुनाव हारे तो विधायक की टिकट के बारे में सोचना पड़ेगा। टिकट दिलाने में सबसे ज्यादा पूर्व मंत्री व विधायक लखन घनघोरिया की चली, लखन ने पूर्व विधानसभा के 21 वार्डो के अलावा उत्तर मध्य के पांच वार्ड व केंट के दो वार्डो में अपनी पसंद के नेता को टिकट दी,केंट की 7 टिकट अभिषेक चौकसे चिंटू के खाते में रहीं। पश्चिम में पूर्व मंत्री व विधायक तरुण भनोत ने समर्थकों को टिकट दिलाई और वे मेयर से ज्यादा पार्षदों के लिए सक्रिय हैं। कांग्रेस के बागी प्रत्याशियों में प्रदेश नेतृत्व ने अब तक सिर्फ एक गोकलपुर वार्ड से पूर्व पार्षद राजेश यादव को पार्टी से निष्कासित किया है जबकि अन्य बागी पार्टी की कार्रवाई से मुक्त हैं।

जनता से वादों का करार, सोशल मीडिया पर वार : भाजपा ने कहा- काम करेंगे शानदार, डॉ जितेंद्र जामदार का कांग्रेसी जवाब - जनता है निराश,ये कैसा विकास


नगर सत्ता की जंग में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा किये गए वादों के जुबानी करार पर सोशल मीडिया पर जबरदस्त वार ने मतदाताओं को खासा प्रभावित किया है। सक्रियता में जग जाहिर भाजपा की आईटी सेल चुटीले और मन को भेदने वाली पोस्ट के जवाब में पिछड़ती दिखी। भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में उद्योगपति, डॉक्टर व बुद्धिजीवियों के वीडियो जारी किये गए, जिन पर टिप्पणी - कमेंट करने वाले भाजपा समर्थक गिनती के और मख़ौल उड़ाने वाले जवाब 100 में 80 रहे। कांग्रेसियों ने डॉ जामदार के पेशे को लेकर कोरोना काल के हालातों पर जमकर घेराबंदी की। चुनाव के दिनों में बिजली कटौती,बिजली बिल, SMS से बिजली बिल की दोषपूर्ण व्यवस्था, सफाई, पानी, जलप्लावन जैसे जनता को परेशान करने वाले मुद्दों पर भाजपा की खासी किरकिरी हुई। वहीं भाजपा के सोशल मीडिया वार में कांग्रेस पर राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों पर भाजपा ने जमकर अटैक किये। भाजपा सरकार के विकास कार्यो, गुंडे-माफिया-आतंकवाद पर अटैक, शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों सहित शहर विकास के मुद्दे भाजपा समर्थकों की पोस्ट में शामिल हैं। भाजपा के स्लोगन " काम करेंगे शानदार-डॉ जितेंद्र जामदार " के जवाब में कांग्रेस का प्रचार " जनता है निराश-ये कैसा विकास " भी सोशल मीडिया पर छाया है। नर्मदा भक्त डॉ जितेन्द्र जामदार के सामने सॉफ्ट हिंदुत्व वाले अन्नू की छवि सोशल मीडिया पर है।

 ( सर्वे के पार्ट-2 में जानने की कोशिश करेंगे किस विस के किस वार्डो में जीत का दावा होगा सफल)

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