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भाजपा को चोट देने की सुपारी ले रखी है एनसीसी व बिजली वालों ने,भीषण गर्मी में कटौती


फ्लाय ओवर के निर्माण में दो साल बीते, धीरे-धीरे हो रही पोल शिफ्ंिटग 

जबलपुर। दमोहनाका से मदन महल तक बनने वाला प्रदेश का सबसे बड़ा कहा जाने वाला फ्लायओवर शहर के नागरिकों के अलावा उस क्षेत्रवासियों के लिए मुसीबत बन गया है। ब्रिज के निर्माण में बिजली पोल की शिफ्ंिटग और केबल का काम बीते दो सालों से सिरदर्द बन गया है। ठंड के सीजन में काम बंद रखकर भीषण गर्मी में बिजली सप्लाई रोक कर किए जा रहे मंथर गति के काम से लोगों को जीना मुश्किल हो गया है। खास बात ये कि इस परेशानी से न जनप्रतिनिधियों को सरोकार है और न ही चुनावी मैदान में ताल ठोकने वाले भाजपा-कांग्रेस नेताओं को मतलब है। सोशल मीडिया में जरूर दोनों दलों के लोग टिप्पणी कर बिजली विभाग पर इल्जाम लगा रहे हैं कि बिजली वालों ने सरकार को डुबाने की सुपारी ले रखी है। इस भीषण गर्मी में लगातार चार से पांच घंटे बिजली बंद रखी जा रही है।

 बिजली विभाग के अधिकारियों ने बता दी अपनी बेबसी

हर दूसरे दिन चार से पांच घंटे की कटौती के कारण लोग गर्मी में बीमार भी पड़ रहे हैं और बिजली विभाग को कोस रहे हैं, लेकिन इस कटौती में बिजली विभाग भी बेवस है। नगर संभाग पश्चिम के डीई सिन्हा ने बताया कि फ्लायओवर निर्माण वाले क्षेत्र में अभी पोल शिफ्टिंग का काफी काम बचा हुआ है। उनके मुताबिक पोल शिफ्टिंग का काम भी कब और कितना करना है यह एनसीसी और पीएडब्लूडी के जिम्मेदार अधिकारी तय करते हैं। साफ शब्दों में कहा जाए तो फ्लायओवर निर्माण वाले क्षेत्र में बिजली से संबंधित जो भी काम किए जा रहे हैं उसमें सिर्फ सुपरविजन बिजली कंपनी का है। काम कब और कैसे करना है, यह तय करने का अधिकार बिजली कंपनी के अधिकारियों के पास नहीं है उनके पास नहीं है। इस साफगोई से ये भी पता चला है कि बीते 2 साल में बिजली पोल शिफ्ंिटग और केबल से संबंधित काम की कोई समय सीमा तय नहीं की गई और जनता को परेशानी भुगतने छोड़ दिया गया।

 नगर निगम चुनाव में प्रत्याशी के सामने निकलेगा जनता का गुस्सा

 शहर मेंअघोषित बिजली कटौती के साथ ही ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति को लेकर आक्रोश पनप रहा है। नगर निगम चुनाव के गर्म होते माहौल में पार्षद और मेयर पद के दावेदार जनता की सेवा का दावा करते हुए आगे आने लगे हैं, और उन्हें पानी-सफाई के साथ ही बिजली की समस्या से संबंधित सवालों का जवाब देना पड़ेगा। बिजली कटौती वाले क्षेत्र के वासियों का कहना है कि उनके दरवाजे पर जब पार्षद पद के प्रत्याशी वोट मांगने आएंगे तो उनसे जरूर यह पूछा जाएगा कि तकलीफ के वक्त वे कहां थे।

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