पार्षद पद के प्रत्याशियों की सूची जारी होने पहले विरोध
जबलपुर। भाजपा में पार्षद प्रत्याशियों की सूची बिना घोषित हुए विवाद में उलझ गई है। संभागीय चयन समिति में तय नाम बाहर आने के बाद भड़की विरोध की आग से भाजपा में खलबली है। आलम ये है कि चयन के जिम्मेदार नेता व पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के फोन तक नहीं उठा रहे हैं। पार्टी का पूरा फोकस विरोधियों का गुस्सा शांत करने पर है। इस बीच सर्वाधिक विरोध वाले आठ वार्डो से प्रत्याशी चेंज करने की खबरें भी हैं। बताया जाता है कि वार्ड से किसी बाहरी प्रत्याशी को उतारा जा रहा है इस सूचना मात्र से महर्षि महेश योगी वार्ड के भाजपाई भड़क गए। एक महिला नेता को टिकट दी जा रही है यह जानकारी मिलने के बाद धनी की कुटिया के पास कार्यकर्ताओं ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वालों में मनीष अग्रहरि, निर्मला माहेश्वरी, विजय,अमित राय,पंकज शुक्ला आदि सहित अनेक कार्यकर्ता शामिल थे।
जातिवाद-परिवारवाद का विरोध ज्यादातर वार्डो में
भाजपा की टिकटों में परिवारवाद-जातिवाद का जम के विरोध हो रहा है। सूची में जाति-धर्म को आधार बनाकर बड़े नेता ही गाइडलाइन के तहत सवाल उठा रहे हैं। वहीं परिजनों को टिकट देने का विरोध भी हो रहा है। कद से छोटे पर दबंगता से बड़े एक नेता ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का जम के विरोध किया है। हालांकि उनके विरोधी उनके बारे में कह रहे हैं कि उन्होंने खुद अपने समर्थकों को टिकट दिलाई है। वहीं कई नेता अपने चेलों को फोन देकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी से पिंड छुड़ाना चाह रहे हैं। इस पूरी कवायद में सवाल उठ रहा है कि टिकटें फाइनल होने के बाद भी आखिर क्यों सूची घोषित नहीं हो रही हैं।
कांग्रेस में भी चयनकर्ताओं को विरोध-बगावत का डर
कांग्रेस भी टिकट चयन के मामले में भाजपा की राह पर है। मेयर की टिकट तो उसने समय पूर्व फाइनल कर दी, पर पार्षदों की सूची जारी करने में पसीने छूट रहे हैं। स्थानीय विधायकों से जब कार्यकर्ता टिकटों की जानकारी मांगते हैं, तो विधायकों का चौका देने वाला ये जवाब होता है कि हमें कुछ नईं पता। कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि जब आपको नहीं पता तो फिर है किसको पता?। कांग्रेस को ये डर भी है कि उसके विरोधी-बगावती अधिकांश वार्ड से आम आदमी पार्टी सहित अन्य दलों से लड़कर समीकरण बिगाड़ सकते हैं। इसलिए प्रयास ये है कि विरोध वाले वार्डो में नामांकन की अंतिम तिथि के पहले ही नाम उजागर किए जायें ताकि विरोधियों को समय न मिल सके।