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वोटों की राजनीति : 25 जून का आपातकाल भूल गए मीसाबंदी और भाजपा के दिग्गज

न कोई आयोजन न ही मीसाबंदियों का हुआ सम्मान 

जबलपुर। पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की आपाधापी ऐसी कि मीसा बंदियों सहित भाजपा के दिग्गज 25 जून को लागू आपातकाल को भूल गए। भाजपा इसे काला इतिहास बताते हुए तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को कोसती रहती है, लेकिन आज जिले में आपातकाल के संदर्भ में कोई आयोजन नहीं हुआ और न ही किसी ने इसे याद किया। पहले जिस तरह के आयोजन आज के दिन हुआ करते थे, वैसे आयोजन नहीं हुए। कुछेक लोगों ने सोशल मीडिया में इमरजेंसी को याद जरूर किया, पर इसको लेकर आयोजना नहीं हुई।

 लोकतंत्र सेनानी संघ सहित सभी रहे चुनाव में व्यस्त

इमरजेंसी का गाना गा-गा कर सत्ता-प्रतिष्ठा पाने वाले अधिकांश लोगों ने खुद को आज मीसाबंदी दिवस से दूर रखा। लोकतंत्र सेनानी संघ जो हर साल आयोजन करता था, उसके अध्यक्ष अंजनी सिंह ठाकुर और उनका एक परिजन कटंगी से चुनाव लड़ रहा है, तो वे उसमें व्यस्त बताए गए। सचिव शंभू नारायण शर्मा पाटन से चुनाव लड़ रहे हैं, तो वे भी गायब रहे। बाकी लोगों सहित भाजपा संगठन ने भी इसे भुला दिया।

 कई नेताओं को मिलती है पेंशन, लेना कोई नहीं भूलता

. मीसाबंदियों को मिलने वाली पेंशन सहित अन्य लाभ कोई नहीं भूलता। इसके लिए बाकायदा आवाज उठाई जाती है। आज इमरजेंसी को लेकर संगोष्ठी आदि के आयोजन नहीं हुए। कइयों को तो याद भी नहीं था कि आज वही दिन है, जिसे वे लोकतंत्र का काला दिवस सालों से कहते आए हैं। ऐसे कई भाजपा नेता हैं जिन्हें सरकार की ओर से मीसाबंदी पेंशन मिलती है और वे पेंशन की राशि लेना कभी नहीं भूलते।

 पहले घर-घर होता था सम्मान, अब कोई याद करने वाला नहीं

जो लोग इमरजेंसी के वक्त मीसाबंद हुए थे, उन्हें पहले घर जाकर सम्मानित किया जाता था। इस दौरान मीसाबंदी सबको उस दौर की कहानी सुनाते थे। ये याद दिलाया जाता था कि किस तरह उस समय तानाशाही के क्रूर पंजों में सब कुछ फस गया था। भाजपा तो मीसाबंदी दिवस को मंडल स्तर पर मनाता रही। आदेश दिए जाते थे कि मंडल अध्यक्ष सहित सारे क्षेत्रीय नेता अपने-अपने मंडल क्षेत्रों में रहने वाले मीसाबंदियों के घर जाकर उनका सम्मान करें।

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