मानकुंअर बाई कॉलेज की सीनियारिटी छोड़ी थी पति के लिए
जबलपुर । ब्रेन हेमरेज से पति की मौत के बाद जबलपुर की प्रोफेसर प्रीति ने भोपाल में भदभदा ब्रिज से कूदकर जान दे दी। पति-पत्नी के बीच प्रेम की बेमिसाल दास्तान यहां खत्म हो गई जबकि प्रीति ने मानकुंअर बाई कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी इसलिए छोड़ दी, कि वह पति डॉ पराग पाठक के पास ही रहना चाहती थी और इसके लिए सीनियरिटी की परवाह किए बगैर भोपाल के नरेला कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बन गई थी।
परिचितों से कहती रही, इनके लिए दुआ करना
जबलपुर की रहने वाली प्रीति की शादी चार साल पहले डॉ पराग पाठक (एमडीएस) से हुई थी। डॉ पाठक की यह दूसरी शादी थी जबकि प्रीति की पहली। डॉक्टर पराग पाठक के पिता हरिशंकर पाठक डिप्टी कलेक्टर रहे हैं, उनका निधन हो चुका है, जबकि पराग की मां शोभा पाठक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और वे वह बहू-बेटे के साथ रहती थीं। डॉ पराग को बीपी की शिकायत थी। इसलिए उनके लो-कैलोरी फूड, ग्रीन टी सब का ख्याल प्रीति खुद रखती थी। तबियत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और इस दौरान अस्पताल जाने वाले उनके सभी परिचितों से प्रीति एक ही बात कहती थी कि इनके लिए दुआ करना कि जल्दी ठीक हो जाएं। अगर ,ये नहीं रहेंगे तो हम भी इनके बिना नहीं रह पाएंगे। बेटे की तबीयत बिगड़ने के बाद मां बहू के साथ अस्पताल में ही रहीं। मंगलवार रात को भी वह बहू के साथ थीं। बेटे की मौत के बाद वह भी अस्पताल में ही बिलखती रहीं। इसी बीच बहू कार लेकर चली गई। बाद में पता चला कि प्रीति ने ब्रिज से कूदकर आत्महत्या कर ली। प्रीति की प्रीत का अंत हो गया, लेकिन उनके परिचित पति-पत्नी के बीच रहे प्रेम संबंधों की चर्चा करते नहीं थकते।
