भवन निर्माण के काम बंद, राहत के लिए बिल्डर एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन
जबलपुर। बढ़ती महंगाई का सीधा असर बिल्डिंग निर्माण सम्बंधी मेटेरियल पर हुआ है जिसके चलते इस समय आम आदमी के लिए अपना आशियाना बना पाना वश के बाहर हो गया है। उधर, दूसरी ओर बिल्डिंग निर्माण के व्यवसाय से जुड़े बिल्डर इत्यादि तबाह होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि साधारण तौर पर हजार-बारह सौ रुपए प्रति वर्गफुट पड़ने वाला अति साधारण कंस्ट्रक्शन भी इस समय औसतन डबल से ट्रिपल पड़ रहा है। इसकी सीधी वजह सिर्फ और सिर्फ बिल्डिंग मेटेरियल का महंगा हो जाना है। हालत यह है कि नए वित्तीय वर्ष में भी रेत,गिट्टी,ईट,सीमेंट,लोहा-स्टील से लेकर साधारण सेनटरी वर्क्स तक कई गुना महंगे में खरीदना पड़ रहा है।
निर्माण कार्य का अस्तित्व संकट में ,क्षतिपूर्ति दे सरकार
इन्ही हालातों के चलते कल मध्यप्रदेश बिल्डर्स एसोसिएशन की ओर से अपर कलेक्टर शेरसिंह मीणा को एक ज्ञापन देकर मुख्यमंत्री से क्षतिपूर्ति की मांग उठाई है। बिल्डर्स का कहना है कि वर्तमान समय में निर्माण कार्य के अस्तित्व पर ही संकट आ गया है। विगत कुछ महीनों में हुई मूल्यवृद्धि ने बिल्डर्स, ठेकेदारों को तबाह कर के रख दिया है। इसलिए इससे राहत दिलाने राज्य सरकार प्रभावी कदम उठाए। अध्यक्ष अनिल ग्रोवर, बिट्टू चढ्ढा, डॉ. अजय शुक्ला आदि ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ये हैं महंगाई का प्रतिशत, काम बंद और लग रही पेनाल्टी
मूल्य वृद्धि के बारे में बताया गया है कि नवम्बर- 21 से मार्च - 22 के दौरान में सीमेंट 40 प्रतिशत, सरिया 63 प्रतिशत, फ्लाय ऐश ब्रिक्स 50 प्रतिशत , पीवीसी कण्ड्यूट् पाइप 61 प्रतिशत, वेट्रिफाइड टाइल्स 33 प्रतिशत, एल्यूमीनियम 80 प्रतिशत, वायर/केबल्स 50 प्रतिशत, कॉपर 58 प्रतिशत और ग्लास 100 प्रतिशत महंगा हो चुका है। इसका नतीजा यह है कि शासकीय ठेकेदार भारी आर्थिक संकट में पड़ गये हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि टेंडर जिस रेट्स पर मंजूर हुए थे बिल्डिंग मेटेरियल आज की तारीख में उस दाम पर मिल ही नहीं रहा। नतीजतन काम बंद हो गया है। इसलिए नुकसान की राशि की क्षतिपूर्ति की जाए। साथ ही अब तक शुरू नहीं नहीं हो सके निर्माण कार्यों को यदि कांट्रेक्टर न करना चाहे तो उनकी जमा राशि बिना पेनाल्टी काटे लौटाई जाए।
पीएम आवास वाले ठेकेदार भी हलाकान,गुजरात सरकार ने दी है राहत
प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत बनाए जा रहे आवासों के कांट्रेक्टर्स पर पड़ रहे आर्थिक बोझ का भी उल्लेख करते हुए उन्हें भी राहत प्रदान करने की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि गुजरात की भाजपा सरकार ने पांच से सात प्रतिशत कांट्रेक्टर्स को रेट बढ़ाकर भुगतान करने की घोषणा की है। इसलिए यदि निर्माण सामग्री की कीमतों में हुई वृद्धि की क्षतिपूर्ति नहीं की गई तो बिल्डर्स के पास काम बन्द कर देने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचेगा। इससे प्रदेश भर में लाखों श्रमिक एवं निर्माण उद्योग से जुड़े अन्य लोग बेरोजगार हो जायेंगे।