श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में ध्रुव चरित्र लीला का वर्णन
जबलपुर। श्री दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर त्रिमूर्ति नगर में श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन ध्रुव चरित्र की लीला का वर्णन किया गया। श्रीमद् भागवत के कथा व्यास पं. अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि भागवत कथा भक्ति, प्रेम, ज्ञान और वैराग्य का संगम है। श्रीकृष्ण भक्ति की एक मात्र विधि है, वह है मात्र प्रेम है। ध्रुव चरित्र लीला के वर्णन करते हुए बताया कि भक्त ध्रुव ने आठ वर्ष की उम्र में ही भगवान की प्राप्ति कर ली थी। जब तक जीव माता के गर्भ में रहता है तब तक वह बाहर निकलने के लिए छटपटाता रहता है। उस समय वह जीव बाहर निकलने के लिए ईश्वर से अनेक प्रकार के वादे करता है। मगर जन्म लेने के पश्चात सांसारिक मोह माया में फंस कर वह भगवान से किए गए वादों को भूल जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप उसे चौरासी लाख योनी भोगनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने जीवन में जिस प्रकार के कर्म करता है उसी के अनुरूप उसे मृत्यु मिलती है। भगवान ध्रुव के सत्कर्मों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ध्रुव की साधना, उनके सत्कर्म तथा ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा के परिणाम स्वरूप ही उन्हें वैकुंठ लोक प्राप्त हुआ।