Type Here to Get Search Results !

विवेक तन्खा का राज्यसभा में दोबारा जाना तय, एकमात्र कश्मीरी पंडित सदस्य

29 जून को कार्यकाल होगा समाप्त, कमलनाथ-दिग्विजय सहमत 

जबलपुर। जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए सियासी गतिविधियां तेज हो गईं हैं। सूत्रों की यदि मानें तो कश्मीर फाइल्स के बाद कश्मीरी पंडितों की हो रही देशव्यापी चर्चा के बीच कांग्रेस ने ‘विवेक’ का इस्तेमाल करते हुए ‘तन्खा’ का नाम फाइनल कर लिया है। वहीं भाजपा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को मप्र से राज्यसभा में भेजने पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून में रिक्त हो रही हैं। संभावना है कि चुनाव 15 जून के पहले करा लिए जाएंगे। एक सीट पर ओबीसी चेहरे को राज्यसभा की टिकट देकर ओबीसी आबादी को साधने की तैयारी है, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि भाजपा से उम्मीदवार कौन होगा? 

भाजपा को मिलेगी 2 और कांग्रेस को मिलेगी 1 सीट

 मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य बने पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर, सम्पतिया उइके और कांग्रेस के विवेक तन्खा का कार्यकाल 29 जून 2022 को समाप्त हो रहा है। एमजे अकबर और विवेक तन्खा 11 जून 2016 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। वहीं, सम्पतिया उइके का निर्वाचन 31 जुलाई, 2017 को हुआ था। वे केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे के निधन से खाली हुई सीट पर निर्वाचित हुई थीं। इन तीन सीटों पर 15 जून से पहले चुनाव होने हैं। मप्र में राज्यसभा की 11 सीटें हैं, इनमें से 8 पर बीजेपी का कब्जा है। तीन सीट पर कांग्रेस काबिज है। मप्र विधानसभा में सदस्यों की मौजूदा संख्या के हिसाब से बीजेपी को 2 और कांग्रेस को 1 सीट मिलेगी।

 कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर राज्यसभा में पेश कर चुके बिल

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा हाल ही में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले थे, क्योंकि उच्च सदन में उनका कार्यकाल 29 जून को समाप्त होने वाला है। इस मसले पर भी सोनिया गांधी के साथ उनकी विस्तृत चर्चा हुई है। विवेक तन्खा को दूसरा कार्यकाल मिलना लगभग तय है क्योंकि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दोनों इस पर सहमत हो गए हैं। पार्टी तन्खा को दोबारा राज्यसभा में भेजकर यह बताना चाहती है कि कांग्रेस ही कश्मीरी पंडितों की हितैषी है। विवेक तन्खा एकमात्र कश्मीरी पंडित राज्यसभा सांसद हैं। विवेक तन्खा ने 2 अप्रैल 2022 को राज्यसभा में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास का प्राइवेट बिल पेश किया। इस विधेयक में कश्मीरी पंडितों के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पुनर्वास, उनकी संपित्त की सुरक्षा, उनकी सांस्कृतिक विरासत की बहाली, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनके पुनर्वास और पुनर्वास पैकेज का प्रावधान और उससे जुड़े या उसके प्रासंगिक मामलों का प्रावधान है। बिल केंद्र सरकार को कश्मीरी पंडित समुदाय के 21 प्रतिनिधियों की एक सलाहकार समिति गठित करने का प्रस्ताव करता है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.