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बुल्डोजर से निशाना बनाए जाने के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने सुको का दरवाजा खटखटाया

याचिका में कहा-राज्यों को निर्देश दें कि बिना कोर्ट की अनुमति न हो तोड़फोड

 नई दिल्ली। साम्प्रदायिक हिंसा और उन्माद की खबरों में सुर्खियां बनने वाली कथित आरोपियों के मकान दुकान पर बुल्डोजर चलाकर जमींदोज करने की कार्रवाई को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया कि मध्यप्रदेश, यूपी और गुजरात में मुसलमानों की संपित्तयों पर बुलडोजर चलाए जाने की कार्रवाई कानून सम्मत नहीं है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के प्रमुख अरशद मदनी ने इसे मुस्लिम वर्ग को निशाना बनाने की साजिश बताया है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया कि राज्यों को आदेश दें कि कोर्ट की अनुमति बिना किसी के घर या दुकान को बुल्डोजर से गिराया नहीं जाएगा। याचिका में केन्द्र सरकार के साथ भाजपा शासित मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात सरकार को पार्टी बनाया गया है।

 मामलों में अदालत की भूमिका नकारने का प्रयास

 खरगोन में 10 अप्रैल को रामनवमी पर हुई हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने अवैध संपित्तयों के खिलाफ अभियान चलाया था। जिसके तहत शहर के चार स्थानों पर बुलडोजर चलाकर 16 घर और 29 दुकानें ध्वस्त की गईं। इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल से सलाह लेने के बाद यह याचिका एडवोकेट सरीम नावेद ने तैयार की है। इसे एडवोकेट कबीर दीक्षति ने ऑनलाइन दायर किया है। इसमें जमीयत उलेमा ए हिंद कानूनी इमदाद कमेटी के सचिव गुलजार अहमद आजमी वादी बने हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि सरकारों द्वारा इस तरह के उपाय हमारे देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को कमजोर करते हैं। इस तरह की घटनाओं से अदालतों की भूमिका को नकारने की कोशिश है। इसे रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

 यूपी के बाद मप्र व गुजरात में शुरू हुआ सिलसिला

जमीयत उलमा-ए-हिंद प्रमुख अरशद मदनी ने कहा कि देश में धार्मिक उग्रवाद और नफरत का माहौल व्याप्त है। अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों को डराने-धमकाने की साजिशें रची जा रही हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें खामोश हैं। मदनी के मुताबिक उत्तरप्रदेश में बुलडोजर की राजनीति पहले से ही चल रही है, लेकिन अब यह नापाक हरकत गुजरात और मध्यप्रदेश में भी शुरू हो गई है। मदनी ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश के खरगोन शहर में रामनवमी के अवसर पर एक जुलूस के दौरान अत्यधिक भडकाऊ नारे लगाकर हिंसा शुरू की गई। इसके बाद राज्य सरकार के आदेश पर मुसलमानों के घरों और दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम मोहल्लों में मस्जिदों के बिल्कुल सामने आकर उकसाया जा रहा है। पुलिस की मौजूदगी में लाठी-डंडे लहराकर नारे लगाए जा रहे हैं और सब मूकदर्शक बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखकर कहा कि मुसलमानों की सम्पत्तियों को टारगेट किया जा रहा है।

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