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फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों की सम्पत्ति पर दर्ज कराया नाम, ईओडब्ल्यू में शिकायत

गोरखपुर तहसील के हृदयनगर में डॉ कमला गुप्ता की जमीन का प्रकरण 

जबलपुर। गोरखपुर तहसील अंतर्गत मौजा हृदयपुर में लगभग 50 करोड़ रुपए की सम्पत्ति कूटरचित दस्तावेज और झूठे शपथ-पत्र के आधार पर हेरफेर कर हड़पने की शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) से की गई है। सूत्रों ने बताया कि मामले पर महेंद्र कुमार पचौरी (गोदनामा स्व. जगदीश गुप्ता) वास्तविक पिता नर्मदा प्रसाद पचौरी निवासी 1837-ए कृपाल चौक की लिखित शिकायत पर जांच की जा रही है। बताया जाता है कि जिला जबलपुर पुरानी तहसील जबलपुर नई तहसील गोरखपुर न.बं. 752, मौजा हृदयपुर, खसरा नं. 36 व 38, प्लाट नं. 01, कुल रकबा 24,300 वर्गफुट को हरनाम सिंह एंव बहादुर सिंह ने हरीशचंद गुप्ता एवं केशव गुप्ता को रजिस्टर्ड विक्रय पत्र दिनांक 10 नवम्बर 1959 को विक्रय किया था। उपरोक्त संपत्ति के मालिक सहखातेदार हरीशचंद गुप्ता ने अपने अविभाजित हिस्सा बिना बंटवारा किये रजिस्टर्ड विक्रय पत्र दिनांक 23 मार्च 1968 को डॉ. कमला गुप्ता पुत्री सोमचंद्र गुप्ता, निवासी- नेपियर टाउन जबलपुर को विक्रय किया गया था। 

 शिकायत में आरोप-कोर्ट को सूचना ही नहीं दी

शिकायत के मुताबिक संपत्ति की एक मात्र मालिक कुमारी श्वेता गुप्ता के द्वारा पहले किसी नाबालिग श्वेता गुप्ता को कमला गुप्ता का वारसान बताकर उसको जबलपुर जिला न्यायाधीश न्यायालय में गोदनामा का प्रकरण प्रस्तुत किया गया। इसमें न्यायालय जबलपुर के द्वारा यह आदेशित किया गया कि उपरोक्त गोदनामा उप पंजीयक कार्यालय से रजिस्टर्ड कराकर प्रस्तुत करें उसके बाद ही संपूर्ण साक्ष्य के बाद अर्थात गोद देने वाले के, गोद लेने वाले के, गोद देने वाली संस्था के एवं अन्य साक्षियों के बयान के बाद ही निर्णय किया जाएगा, लेकिन मात्र उपपंजीयक कार्यालय मे गोदनामा को रजिस्टर्ड कराकर बिना न्यायालय को सूचना दिए समस्त संपत्ति पर श्वेता गुप्ता का नाम दर्ज हो गया। बताया जाता है कि केशवदत्त गुप्ता के अन्य भाईयों व उनके वारसानों को सूचना नहीं दी गई। उपरोक्त दस्तावेज शपथ पत्र के आधार पर केशव दत्त गुप्ता जो कि चार भाई थे क्रमश: सबसे बड़े केशव दत्त गुप्ता, दूसरे नम्बर के शिव दत्त गुप्ता, तीसरे नम्बर के ईश्वरचंद चंद्र गुप्ता और चौथे नम्बर पर प्रदीप कुमार गुप्ता है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत संपत्ति के नामांतरण मे किसी भी मृत व्यक्ति के सभी वारसानों को सूचना देना आवश्यक है। आवेदक के पक्ष में स्वयं जगदीशचंद्र गुप्ता स्वयं रजिस्टर्ड वसीयतनामा निष्पादित कराई एंव केशव दत्त गुप्ता ने अपने हस्तलिखित कलम से भी आवेदक के पक्ष मे वसीयत लिखी थी। एक अन्य वारसान के द्वारा भी उपरोक्त संपत्ति को लेकर न्यायालय के समक्ष भी प्रकरण प्रस्तुत किया जा चुका है वह भी विचाराधीन है।

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