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ट्रेनों में यात्रियों को दूषित खाद्य सामग्री बेचने वाले दोषियों पर क्यों नहीं होती कार्रवाई

नागरिक उपभोक्ता मंच ने जीएम सहित अधिकारियों को भेजा लीगल नोटिस 

जबलपुर। जबलपुर से सतना रेलखण्ड के बीच 28 अप्रैल को पुणो-दरभंगा(ज्ञानगंगा) एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में जांच के दौरान पाये गए खराब अण्डे,बदबू मार रहे दही एवं सड़े हुये पनीर एवं 125 पेटी अमानक पानी की बोतलें मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सीधे यात्रियों के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मसले को आड़े हाथों लेते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्ग दर्शक मंच के डॉ.पीजी नाजपाण्डे तथा रजत भार्गव ने पमरे जीएम, जीएम खाद्य एवं सुरक्षा प्राधिकरण(दिल्ली), आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं नियंत्रण(भोपाल) एवं मैनेजर रेल मण्डल जबलपुर को लीगल नोटिस भेजकर 15 दिवस के अंदर जवाब मांगा है। डॉ. पीजी नाजपाण्डे ने नोटिस में जिन बिंदुओं का उल्लेख किया है उसमें न सिर्फ खाद्य एवं सुरक्षा के मुद्दे पर रेलवे की कमी को उजागर किया है बल्कि यात्रियों के स्वास्थ्य के प्रति रेल अधिकारी कितने लापरवाह हैं इसका भी आईना दिखाया गया है।

 100 स्टेशनों के लिए मात्र एक अधिकारी, वो भी काम का नहीं

बीते 5 वर्षो से पश्चिम मध्य रेल जोन के सभी मुख्य 100 रेलवे स्टेशनों के लिए मात्र एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी रखा गया है। नतीजतन न तो सेंपलिंग हो रही है और न ही जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो रही है। बीते 5 वर्षो में एक भी दोषी के खिलाफ मुकदमा दायर नहीं किया गया है और न ही दोषी पाये जाने वाले का केटरिंग का लाइसेंस निरस्त किया गया है। ताजा उदाहरण 125 पेटी अमानक पानी की बोतलें बेचने वाले का आज भी केटरिंग लाइसेंस जिंदा है। ऐसा ही कुछ हाल अवैध वेंडरों का है,अकेले जबलपुर रेलवे मण्डल के स्टेशनों पर लगभग 300 वेंडर सक्रिय हैं जिनके द्वारा उन उत्पादों की बिक्री भी की जा रही है जिन्हे रेलवे बोर्ड ने न तो रेलवे प्लेटफार्म और न ही चलती हुई ट्रेनों में बिक्री की अनुमती दी हुई है,फिर भी कुछ चीजों की बिक्री धड़ल्ले के साथ की जा रही है।

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