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सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे शक्ति की उपासना, 819 बंदियों ने रखा व्रत, 5 रहेंगे मौन

जेल प्रशासन करता है पूजन-भजन व फलाहार की व्यवस्था 

जबलपुर। चैत्र नवरात्र प्रारंभ होते ही शहर देहात में मां भगवती की आराधना और अनुष्ठान शुरू हो गए, वहीं सेंट्रल जेल की सलाखों में कैद अपराधियों ने भी शक्ति की उपासना प्रारंभ की। खास बात ये कि जेल में बंदियों को भजन-पूजन के साथ ही फलाहार की व्यवस्था जेल प्रशासन द्वारा की जाती है। शातिर अपराधियों के देवी भक्त होने के प्रमाण उनके जेल जाने से पहले भी मिलते रहे हैं। जेल में सजा काट रहे अपराधियों में और अधिक भक्ति भाव देखने मिलता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल में 800 से अधिक कैदी/बंदी चेत्र नवरात्र का व्रत रखकर भगवती की पूजा-अर्चना में लीन हैं। शाम को करीब-करीब सभी बंदी भजन-कीर्तन भी करते हैं। नवरात्र के पहले दिन 785 पुरु ष और 34 महिलाओं ने व्रत रखा है। जेल परिसर में एक मंदिर भी बना हुआ है। बंदी यहां पर पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र में मंदिर में पूजा करने वाले बंदियों की संख्या अधिक हो जाती है। जेल में फिलहाल 2250 के आसपास कैदी/बंदी हैं। चैत्र नवरात्र में कुछ लोग मौन व्रत भी रखते हैं। जानकारी के मुताबिक 5 बंदी जेल में मौन व्रत रखे हुए हैं। मौन व्रत रखने वाले बंदी अपने साथी बंदियों के साथ रहकर इशारे में अपनी बात समझाने का प्रयास करेंगे। जेल प्रशासन द्वारा व्रत रखने वाले बंदियों के लिए फलाहार की व्यवस्था की गई है। त्योहारों के अलावा अन्य जो भी पर्व जिन पर व्रत रखा जाता है उन पर अधिकतर बंदी व्रत रखने के साथ पूजन-अर्चन करते हैं। जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने बताया कि जेल मैनुअल के अनुसार बंदियों को फलाहार दिया जाता है। सुबह-शाम चाय के अलावा दूध, केला व सेंधा नमक, मूंगफली, तले हुए आलू भी उपलब्ध कराए जाते हैं। कोई बंदी पूजन अर्चन की सामग्री मांगता है तो उसे वह भी उपलब्ध कराई जाती है। उपवास रखने वाले दुर्गा सप्तशती पाठ, दुर्गा चालीसा व मंत्रों का उच्चारण भी करते हैं।

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1 Comments
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  1. Jo jail prashan kaidio ko unki jarurat ka saman uplabhdh karane ka paisa leti hai
    Aap ko lagta hai ki jail prashan pujan samgri aur fal-fruit ka Paisa degi,
    Sarkari tantra hi bana ab ,
    Yadi janta ko koi suvidha chahiye to rishwat do tabhi kam hoga,
    Tabhi to inke ladake bachhe,aapahij ya kisi bimaari ka sikar hote rahta,
    Kahi na kahi se uper wala nikata ha

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