पुलिस ने की मुनादी- हाईकोर्ट का आदेश है, विरोध किया तो होगी कार्रवाई
जबलपुर। लेमा गार्डन में बने पीएम आवास योजना के मकानों पर बेजा कब्जे हटाने रविवार की सुबह भारी फोर्स के साथ पहुंचे प्रशासन ने मकान खाली कराने के पहले हाईकोर्ट के आदेश की मुनादी की। मकानों पर अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही एक युवक मासूम बच्चे को लेकर बालकनी से कूदने खड़ा हो गया, उसे बमुश्किल नीचे उतारा गया। राजस्व और नगर-निगम सहित बड़ी संख्या में प्रशासनिक टीम ने यहां पहले ही एनाउंस किया कि यह कार्रवाई हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश पर की जा रही है। इसलिए इसका विरोध करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर ,सुबह-सुबह कार्रवाई की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय नेताओं सहित नगर-निगम के कुछ कर्मचारी नेताओं ने भी यहां पहुंच कर विरोध करना शुरू कर दिया जिसके चलते हंगामे की स्थिति बन गई। प्रशासन को एनाउंस करना पड़ गया कि जो कर्मचारी काम नहीं करना चाहते वे यहां से अलग हो जाएं ,लेकिन कार्रवाई जारी रहेगी।पुलिस-प्रशासन से झड़प, मिला दोहपर तक का समय
बेदखली का विरोध कर रहे पीएम आवास में रहने वालों ने आक्रोश में यहां पुलिस-प्रशासन से झड़प करना शुरू कर दी। इसके चलते प्रशासन को सख्ती करना पड़ी और पुलिस बल ने लोगों को खदेड़ना शुरू कर दिया। इसके कारण यहां शहर से भी लोग पहुंच गए और प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ लामबंद होने लगे। उधर, प्रशासन की दो टूक चेतावनी यह रही कि कार्रवाई का विरोध करने वालों पर कानूनी कार्रवाई कर दी जाएगी। बताया जाता है कि लोगों को मकान खाली करने दोपहर तक का समय दिया गया। यहां एसडीएम अधारताल नम: शिवाय अरजरिया, सीएसपी अखिलेश गौर, तहसीलदार राजेशसिंह, थाना प्रभारी अरविंद चौबे आदि के साथ रहवासियों की बार-बार झड़प की नौबत आई।
सामान समेट कर ट्रक में रखवा दिया
इस कार्रवाई से लेमा गार्डन में हड़कम्प की स्थिति बनी रही। उल्लेखनीय है कि लेमा गार्डन के सभी 434 मकानों में रहने वालों की प्रशासन ने दो दिन पहले ही जांच की है। बताया जा रहा है कि विगत दिनों मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा कलेक्टर को जारी शोकॉज नोटिस के बाद से ही पीएम आवास का मामला हाईलाइट हो गया है। इसमें जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे थे। कहा गया कि यदि यहां बेजा कब्जे हो रहे थे तो उसमें निगम प्रशासन की भूमिका क्या थी और समय रहते इसकी पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा कर नियम अनुसार कार्रवाई क्यों नहीं हो