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लंबे समय से लटकी मांगें ,परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षकों ने किया काम बंद

अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से पहले दिया मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन 

 जबलपुर। एकीकृत बाल विकास परियोजना में लंबे समय से लटकी मांगों को लेकर प्रदेश के सभी परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। एकीकृत आईसीडीएस परियोजना अधिकारी संघ और पर्यवेक्षक संघ ने संचालनालय और शासन स्तर पर ज्ञापन देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी समस्याओं का निराकरण करने गुहार लगाई है। मुख्यमंत्री के नाम संभाग कमिश्नर, कलेक्टर और जिला कार्यक्रम अधिकारी के माध्यम से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है, कि लम्बे समय से चली आ रही मांगों के बावजूद शासन उनकी सुध नहीं ले रहा है, इसलिए आज काम बंद करना पड़ा है। हालत यह है, कि प्रदेश के परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षकों की वेतन विसंगति और पदोन्नति सम्बंधित मांग पिछले 25 साल से शासन के स्तर पर लंबित पड़ी हैं। विभाग द्वारा इनका आज तक निराकरण नहीं किया गया है। इससे प्रदेश के परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षक आक्रोशित हैं।

 देश में अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम ग्रेड पे

ज्ञापन में कहा गया कि उनका वेतनमान देश के अन्य राज्यों के मुकाबिले काफी कम है। मांग की गई है, कि परियोजना अधिकारियों की ग्रेड-पेय 3600 रुपए से बढ़ा कर 4800 रुपए किए जाएं। वर्तमान में देश के अन्य राज्यों में सबसे कम एवं विकासखंड स्तरीय समकक्ष अधिकारियों में सबसे कम ग्रेड-पे परियोजना अधिकारियों का है। इसी तरह पर्यवेक्षकों का ग्रेड-पे 2400 रुपए से बढ़ा कर 3600 रुपए किया जाए। वर्तमान में पर्यवेक्षकों का ग्रेड-पे देश के अन्य राज्यों में सबसे कम है। ज्ञापन में यह भी उल्लेखित है, कि परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों का ग्रेड पे बढ़ा कर क्रमश 4800 और 3600 रुपए करने का निर्णय विभागीय मंत्री से अनुमोदित प्रस्ताव अगस्त 2018 से वित्त मंत्रलय में लंबित है।

 पुलिस व वित्त विभाग की तर्ज पर 4 स्तर पर टाइम स्केल दो

परियोजना अधिकारियों को सामान्य प्रशासन, पुलिस और वित्त विभाग की तरह चार स्तरीय टाइम स्केल दिया जाए। पर्यवेक्षकों का नियमित प्रमोशन कर परियोजना अधिकारी के रिक्त पद भरे जाएं। वर्तमान में विगत 30 साल से अनेक पर्यवेक्षक एक ही पद पर पदस्थ हैं। पर्यवेक्षक को पूरे सेवाकाल में 3 प्रमोशन दिए जाएं। परियोजना अधिकारियों को आहरण संवितरण अधिकारी पुन: देकर विकेंद्रीकरण किया जाए। साल 2016 से आहरण संवितरण अधिकारों को बिना किसी औचित्य के केंद्रीयकरण कर जिला अधिकारियों को दिया गया है। इसे समाप्त कर पुन: परियोजना स्तर पर दिया जाए। देश के अन्य सभी राज्यों में परियोजना अधिकारियों को डीडीओ दिया गया है और भारत सरकार की गाइडलाइन में भी परियोजना अधिकारियों को डीडीओ देने का प्रावधान है।

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