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गांव तक का पहुंच मार्ग खराब, नहीं पहुंच पाया जननी वाहन, इंतजार में घर पर हुई डिलीवरी, अस्पताल में भी नहीं मिला उपचार, नवजात की मौत




 -लापरवाही या सिस्टम में खामी 15 मिनट में पहुंचने की बात कहता रहा जननी का ड्राइवर, अस्पताल में न डाक्टर मिली न नर्स

अदनान खान सलामतपुर रायसेन।
बासिया गांव में जननी एक्सप्रेस की देरी और अस्पताल में उपचार के लिए डाक्टर व नर्स नहीं मिलने के कारण एक नवजात की मौत हो गई। प्रसूता के पति खेमचंद जाटव ने उसकी बेटी की मौत का कारण अस्पताल में ड्यूटीरत डाक्टरों को बताया है। खेमचंद ने बताया कि यदि ड्यूटीरत नर्सं या डॉक्टर मिल जाते तो नवजात को समय से उपचार मिल जाता और वह बच जाती। लेकिन अस्पताल ड्यूटी पर कोई भी मौजूद नहीं था जिसके कारण उसकी मौत हो गई। दरअसल बासिया गांव की एक प्रसूता कती जाटव को प्रसव पीड़ा होने पर उसके पति खेमचंद जाटव ने 11 बजे जननी एक्सप्रेस को फोन लगाया तो जननी के ड्राइवर ने 15 मिनट में पहुंचने की बात कही। जब साढ़े 11 बजे तक जननी नहीं पहुंची और प्रसव पीड़ा बढ़ने लगी तो पति खेमचंद ने दोबारा फिर फोन लगाया तो ड्राइवर ने फिर 15 मिनट में पहुंचने की बात कही। बार-बार फोन लगाने पर ड्राइवर 15 मिनट में पहुंचने की ही बात कहता रहा। इस बीच दोपहर 12 बजे महिला की घर ही डिलीवरी हो गई। डिलीवरी होने के आधा घंटा बाद जननी एक्सप्रेस गांव से 1 किमी दूर मार्ग तक पहुंची, जहां से परिजन बाइक से प्रसूता और नवजात को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज लेकर आए। यहां न नर्स मिली न ही डॉक्टर जिसके चलते वह वहीं
करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करते रहे। दो बजकर 17 मिनट पर दूसरी नर्स लिक्कोस लिलिमा जिन्होंने महिला को देखने पहुंची। बजाए कागजी खानापूर्ति करने महिला के पति को महिला के उपचार संबंधी दस्तावेज लेने भेज दिया। महिला का पति दस्तावेज लेकर आया तब तक नवजात बेटी की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई करने की मांग की है।

ड्यूटी पर ही नहीं आई नर्स--
सुबह 8 बजे से 2 बजे तक कमला अहिरवार नर्स की ड्यूटी थी जो भोपाल से अपडाउन करती है। लेकिन रविवार को वह ड्यूटी पर नहीं आई। वहीं दो बजे से नर्स लिक्कास लिलिमा की थी। खेमचंद जाटव दोपहर एक बजे प्रसूता और नवजात अस्पताल व गए थे, लेकिन डेढ़ घंटे तक पहुंच गए अस्पताल में कोई नहीं पहुंचा। दोपहर 2 बजकर 17 मिनट पर नर्स लिक्कोस लिलिमा पहुंची जिन्होंने महिला के दस्तावेज देखने में ही समय को जाया कर दिया, इस बीच उपचार नहीं मिलने से नवजात की मौत हो गई।

इनका कहना है।
मामले की जांच की जा रही है।
बाँसिया गांव में 108 लेने के लिए देरी से पहुंची थी, जिसके चलते प्रसूता की डिलेवरी घर पर ही हो गई थी। जिसके बाद 108 लेकर आई तो यहां पर नर्स कमला अहिरवार डयूटी पर नहीं मिली है। जिनके खिलाफ कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अफसरों को प्रतिवेदन भेजा है। 
सुनिल राय, बीएमओ सांची

रास्ता खराब होने से वाहन घर तक नहीं जा सका।
बांसखेड़ा से एक केस छोड़कर आ रहा था। इसी बीच 11.24 पर मुझे कॉल मिला था। जिसके बाद गांव के मुख्य मार्ग तक पहुंच गए थे। चूंकि रास्ता खराब होने के कारण प्रसूता के घर तक गाड़ी नहीं जा सकती थी। इसलिए मुख्य मार्ग तक आने के लिए फोन पर कहा। प्रसूता का पति ने अपने दो पहिया वाहन से जननी तक उसे छोड़ा जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आई, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र पर डाक्टर और नर्स कोई नहीं था इसलिए दाई को मरीज सौंपकर आ गया। 
भूपेन्द्र लोधी, ड्रायवर जननी वाहन।




    

*सम्पूर्ण समाचारो के लिए न्याय क्षेत्र भोपाल होगा समाचार का माध्यम मध्य प्रदेश जनसम्पर्क है
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