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100 वे वर्ष में देह त्याग ब्रम्हलीन हो गए सनातन धर्म के सर्वोच्च पद अधिकारी



 

द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी का महाप्रयाण

जबलपुर। अंतिम दर्शन को तरसीं आंखों को तृप्ति मिली जब पूज्य शंकराचार्य को झोतेश्वर स्थित मणिद्वीप आश्रम से पालकी पर गंगा कुण्ड स्थल पर ले जाया गया। इस दृश्य को देखकर और कैमरे में कैद करने वाले हजारों भक्तों ने चंद मिनटों में पूरी दुनिया को महाराज श्री के अंतिम दर्शन करा दिए। सनातन धर्म के सर्वोच्च पद अधिकारी, द्वारका एवं शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती  महाराज रविवार को अपरान्ह 3:35 बजे देह त्यागकर ब्रम्हलीन हो गए। मात्र 9 वर्ष की आयु में परिवार छोड़कर सनातन धर्म की सेवा शुरू करने वाले स्वामी स्वरूपानंद जी ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया, श्री राम मंदिर आंदोलन में कानूनी लड़ाई लड़ी और देश-दुनिया के अनगिनत भक्तों की आस्था का केंद्र बने। महाराज श्री की पार्थिव देह को सोमवार को सायं 4 बजे समाधि के साथ विदाई दी जाएगी।महाराज श्री की जीवन यात्रा को शब्दों में संजोना संभव नही है। शंकराचार्य जी के महाप्रयाण से करोड़ों हिन्दू स्तब्ध हैं।

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