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होटल में भाजपा ने पार्षदों को कैसी ट्रेनिंग दी कि अपील समिति में बहुमत कांग्रेस का हो गया !

अधिकारियों पर अंकुश लगाने का अधिकार है अपील समिति को 

जबलपुर। नगर निगम सदन में बहुमत होने के बाद भी अध्यक्ष व अपील समिति के चुनाव में भाजपा को अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी करना पड़ी। इस संबंध में कांग्रेस के सवाल पर भाजपा नेताओं ने बाड़ाबंदी जैसी बात से इंकार कर कहा कि पार्षदों को नजरबंद नहीं रखा गया बल्कि पार्टी के निर्देश पर पार्षदों को दो दिन प्रशिक्षण देने के लिए एक स्थान पर ले जाया गया था। अपील समिति के चुनाव के बाद अब सवाल उठ रहा है कि संगठन या जिम्मेदार नेताओं ने पार्षदों कैसा प्रशिक्षण दिया? क्योंकि जहां भाजपा के 3 सदस्य अपील समिति में चुने जाना थे, वहां 2 ही जीत पाए और समिति के पदेन अध्यक्ष मेयर होने के कारण अपील समिति में कांग्रेस का बहुमत कहा जाएगा। अपील समिति को अधिकारियों पर अंकुश लगाने का अधिकारी मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम में दिया गया है।

 अनुपातिक प्रतिनिधित्व का प्रशिक्षण नहीं मिला

 दरअसल,नगर निगम अपील समिति के चुनाव में अनुपातिक प्रतिनिधित्व और समिति के लिए चयनित पार्टी के प्रत्याशी के लिए फस्र्ट व सेकंड प्रेफरेंस पद्धति से वोट डाले जाना थे और भाजपा पार्षद इसमें प्रशिक्षित होते तो संख्या बल के हिसाब से अपील समिति के 4 सदस्यों के चुनाव में तीन भाजपा के निर्वाचित होते और कांग्रेस को एक से ही संतोष करना पड़ता। वहीं चुनाव के परिणाम आए तो भाजपा के सुभाष तिवारी व रेणु कोरी को 17-17 और तीसरे प्रत्याशी अनुराग राहुल साहू को 11 अनुपातिक प्रतिनिधित्व में 11 वोट ही मिले। फस्र्ट और सेकंड प्रेफरेंस पद्धति में कांग्रेस प्रत्याशी अरुणा साहू को 18 व गार्गी यादव को 15 वोट मिले और दोनों को निर्वाचित घोषित किया गया।

 दो-दो की बराबरी में मेयर की भूमिका महत्वपूर्ण

 नगर निगम सदन की चार सदस्यीय अपील समिति में भाजपा और कांग्रेस दोनों के दो-दो सदस्य निर्वाचित हुए। तकनीकि तौर पर देखा जाए तो अपील समिति में कांग्रेस का ही बहुमत है क्योंकि मेयर समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं। ऐसे में यदि किसी निर्णय पर फैसला बहुमत से नहीं हो पाया तो उस प्रकरण में निर्णय देने में अपील समिति के अध्यक्ष यानि मेयर की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। बता दें कि अपील समिति के लिए पांच सदस्यों ने नामांकन दाखिल किया था। जिसमें भाजपा के डॉ. सुभाष तिवारी, रेणु कोरी और कांग्रेस की अरूणा साहू और गार्गी यादव को जीत हासिल हुई। जबकि भाजपा के अनुराग राहुल साहू को हार का सामना करना पड़ा।

 क्या है अपील समिति के अधिकारी जानना जरूरी

. जानकारों ने बताया कि अपील समिति शहरवासियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। नगर निगम कमिश्नर या उनके अधीनस्थ कोई भी अधिकारी यदि शहर से जुड़े किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई या आदेश जारी करता है और वह व्यक्ति उस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है तो वह अपील समिति के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त कर सकता है। अपील समिति उस मामले को सुनकर सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद यदि पीड़ित का पक्ष सही पाती है तो उस आदेश को निरस्त कर सकती है। जानकारी के मुताबिक यदि अपीलकर्ता अपील समिति के भी निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो उसके बाद कोर्ट जा सकता है। जहां भी अपील समिति के निर्णय को गंभीरता से लिया जाता है। कुछ लोग जानकारी के आभाव में नगर निगम अधिकारियों के दुखी होकर सीधे न्यायालय भी चले जाते हैं लेकिन यदि कोर्ट चाहे तो अपीलकर्ता को पहले अपील समिति में अपनी बात रखने का आदेश दे सकती है।

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