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अन्नू की एमआईसी में तरुण-लखन की चली, पश्चिम से 4 और पूर्व से 3 पार्षदों को किया शामिल

एक ठेकेदार और एक आरोपों से घिरे पार्षद को पद मिलने से असंतोष भी 

जबलपुर। मेयर जगत बहादुर सिंह अन्नू की मेयर इन काउंसिल के गठन के साथ ही इसमें अपने पार्षदों को शामिल कराने को लेकर कांग्रेसी विधायकों की बीच मची खींचतान चर्चा में आ गई, तो वहीं पार्षदों में भारी असंतोष की खबर है। विधायकों में तो इस कदर गुटबाजी दिखी कि एमआईसी के गठन के लिए आयोजित की गई विधायकों की बैठक में कांग्रेस के एक विधायक को न तो न्यौता भेजा गया न ही उनके विधानसभा क्षेत्र के वार्ड से जीतकर आए पार्षदों को तवज्जो दी गई। जबकि एक ऐसी विधानसभा से चुनकर आए पार्षद को एमआईसी में शामिल किया गया है, जहां कांग्रेस का विधायक ही नहीं है। हालांकि इसके पीछे जातिगत आरक्षण को साधने का तर्क दिया जा रहा है, क्योंकि दल में एसटी वर्ग से एक ही पार्षद है।

 पश्चिम का पलड़ा भारी, वहीं एक महिला पार्षद को पद पसंद नहीं

 मेयर जगत बहादुर सिंह अन्नू की एमआईसी में सबसे ज्यादा पश्चिम विधानसभा का पलड़ा भारी रहा है। यहां से चार पार्षदों को शेखर सोनी, मनीष महेश पटैल, हेमलता सिंगरौल व दिनेश तामसेवार को एमआईसी में शामिल किया गया है। तो वहीं पूर्व विधानसभा से तीन गुलाम हुसैन, एकता गुप्ता, जितेंद्र सिंह ठाकुर व उत्तर मध्य से दो अमरीश मिश्र व शुगुफ्ता उस्मानीऔर पनागर विधानसभा से लक्ष्मी गोंटिया को मेयर इन काउंसिल में शामिल किया गया है। यदि स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग को छोड़ दिया जाए तो वजनदार और मलाईदार विभाग भी पश्चिम और पूर्व के पार्षदों को ही मिले हैं। एमआईसी में सदस्यों को वितरित विभाग को लेकर भी दिग्गज विधायकों में खीचतान चली। बताया जाता है कि कुछ कांग्रेस नेताओं सहित पार्षदों ने गुलाम हुसैन को एमआईसी में शामिल करने का विरोध करते हुए उनके खिलाफ उछले भ्रष्टाचार के मामलों को आधार बनाया, वहीं पेशे से ठेकेदार मनीष पटैल को लेकर भी असंतोष उभरा। पूर्व पार्षद दिनेश सिंगरौल की पत्नी हेमलता ने तो एमआईसी में शामिल किए जाने के बाद पद लेने से इंकार कर दिया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसकी खास वजह विभाग के बटवारे में अनदेखी करना है। हेमलता को सामान्य प्रशासन विभाग दिया गया है, जो उन्हें पसंद नहीं है।

 मेयर जब चाहें कर सकते हैं बदलाव, सबको साधने की नीति

. बता दें कि नगर निगम अधिनियम 1956 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मेयर जगत बहादुर सिंह अन्नू जब चाहें वर्तमान में शामिल किए गए सदस्यों को अलग कर दूसरे सदस्यों को मेयर इन काउंसिल में शामिल कर सकते हैं। हालांकि ऐसा सदस्यों के परफार्मेस व विशेष परिस्थितियों को देखकर किया जाता है, लेकिन इसके अधिकार मेयर पद में निहित होते हैं।

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