विधायकों से भी राय ली जाएगी, फिलहाल अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर फोकस
भोपाल। नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश की नगर निगमों में पार्टी के प्रदर्शन को कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने संतोषजनक माना है, लेकिन नगर पालिका व नगर परिषदों के चुनाव में मिली पराजय को गंभीरता से लिया है। पार्टी का मानना है कि 5 नगर निगमों में मेयर पद की जीत और दो नगर निगमों में कम अंतर से हारने के बाद भी भाजपा को खासी टक्कर देकर कांग्रेस ने जनता का भरोसा जीता है। वहीं नगर निगम व नगर पालिका में पार्षदों की पराजय क्यों हुई इसकी समीक्षा शुरू की जा रही है। फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का फोकस अध्यक्ष व उपाध्यक्ष से लेकर जिला पंचायतों के अध्यक्ष चुनाव पर है और स्थानीय स्तर पर होने वाली समीक्षा की रिपोर्ट मिलने के बाद पीसीसी हर एक निकाय की समीक्षा करेगी। कई विधायकों और जिला अध्यक्ष हारे हुए पार्षद उम्मीदवारों से फार्म भरवा रहे हैं कि उनकी हार के क्या कारण रहे। इधर प्रदेश संगठन ने साफ किया है कि फिलहाल उसकी प्राथमिकता उन जगहों पर अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बनवाने की है, जहां पार्टी के लिए कुछ गुंजाइश है।
अभी स्थानीय फिर प्रदेश स्तर पर होगी हार की समीक्षा
नगर पालिका और नगर परिषदों में अधिकांश शहर और कस्बों में कांग्रेस के पार्षद उम्मीदवार बड़ी संख्या में हारे हैं। कांग्रेस इस हार की समीक्षा में जुट गई है। क्षेत्र के विधायक और जिला अध्यक्ष अब अपने वार्ड पार्षदों की हार की समीक्षा में अपने स्तर पर कर रहे हैं। कुछ जगहों पर हारे हुए वार्ड उम्मीदवारों को एक फार्म दिया गया है, जिसमें कई बिंदुओं की जानकारी मांगी गई है। उनके क्षेत्र में उन्हें हार का कारण तो इसमें बताना ही होगा साथ ही किन-किन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका काम नहीं किया इसकी भी जानकारी उसमें देना होगी। इसके साथ ही पार्टी को बूथ से लेकर वार्ड में क्या-क्या करना होगा यह भी सुझाव मांगा जा रहा है। इस फार्म का प्रयोग विदिशा में किया जा रहा है। कुछ और जिले भी इस तरह से समीक्षा कर सकते हैं। इधर प्रदेश संगठन ने कहा है कि फिलहाल पार्टी का फोकस जिला और जनपद पंचायत में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ ही नगर पालिका और परिषदों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर है। इसके बाद ही समीक्षा की जाएगी।
