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नगर पालिका, नगर परिषदों में अध्यक्ष पद पर भाजपा परिवार वाद से रहेगी दूर

सीएम हाउस में बैठक कर प्रभारियों को दिए गए निर्देश

 भोपाल। जिला और जनपद पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी समर्थित नेताओं की ताजपोशी के बाद भाजपा का फोकस अब नगरपालिका, नगर परिषद अध्यक्ष और नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष के पदों पर है। इसको लेकर पार्टी ने उन सभी नगर निगम और नगरपालिका प्रभारियों को क्षेत्र में भेज दिया है जहां अब शपथ के बाद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष के चुनाव होना हैं। इस बीच पार्टी दलीय आधार पर हुए नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा विधायकों, जिला अध्यक्षों व पार्टी पदाधिकारियों के परिजनों को इन पदों पर बैठाने से तौबा कर सकती है। प्रदेश संगठन ने इसके संकेत नगर निगम और नगर पालिका प्रभारियों को दिए हैं। इसके साथ ही जिला अध्यक्षों से नगर परिषदों में भी प्रभारी भेजने के लिए कहा गया है। इस संबंध में रविवार को सीएम हाउस में बैठक भी हुई जिसमें प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

 जहां पार्षद कम, वहां उपाध्यक्ष पद पर जोर लगाएंगे प्रभारी

प्रदेश भाजपा ने चुनाव परिणाम आने के पहले ही नगर निगम और नगरपालिका के लिए प्रभारियों की नियुक्ति कर दी थी। परिणाम आने के बाद अब चूंकि 16 नगर निगम और 76 नगरपालिकाओं में महापौर, पार्षदों की शपथ के बाद प्रथम सम्मिलन की तैयारी है और इस सम्मिलन में नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष तथा नगर निगम में सभापति और नेता प्रतिपक्ष का चुनाव होना है। इसलिए इन पदों पर भाजपा के लोगों की ताजपोशी के लिए संगठन ने व्यापक रणनीति पर काम शुरू किया है। ब्लाक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर पर इसको लेकर मंथन चल रहा है और बीजेपी हर छोटी नगर परिषद तक को विशेष फोकस कर रही है ताकि उस पर पार्टी के पार्षद को ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाया जा सके। भाजपा की कोशिश है कि जहां भाजपा के कम पार्षद हैं वहां भी अध्यक्ष उपाध्यक्ष का पद भाजपा के निर्वाचित पार्षद को मिलने में कोई कसर न रखी जाए। इसी को लेकर प्रदेश संगठन के निर्देश पर सभी नगर पालिका व नगर निगम प्रभारी जिलों में हैं और पार्टी के साथ कांग्रेस व निर्दलीय पार्षदों से भी संवाद कर प्रदेश संगठन को रिपोर्ट दे रहे हैं।

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