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‘ बमतुल बुखारा ’ का पूजन, क्रांतिवीर चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का किया दुग्धअभिषेक

बरसते पानी में भी कम नहीं हुआ युवाओं का उत्साह 

जबलपुर। आजादी की लड़ाई के महान क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर तरुण शक्ति संगठन द्वारा आजाद पार्क में स्थापित प्रतिमा पर युवाओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। ‘बमतुल बुखारा’....जी हां, क्रांतिवीर चंद्रशेखर आजाद अपनी माउजर पिस्टल को इसी नाम से पुकारते थे और जीवन पर्यन्त आजाद रहे शहीद चंद्रशेखर ने अपनी जीवन संगिनी बमतुल बुखारा से ही आत्मबलिदान दिया था। तरुण शक्ति के प्रमुख एवं भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटैरया ने ‘बमतुल बुखारा’ का पूजन कर क्रांतिवीर की प्रतिमा का दुग्ध अभिषेक करने के बाद पुष्पांजलि अर्पित की। 

 क्रांतिवीर के जयघोष से गूंज उठा आजाद पार्क

 विजय नगर स्थित आजाद पार्क में तरुण शक्ति संगठन ने भव्य समारोह में नई प्रतिमा का अनावरण गत वर्ष अमर बलिदानियों के परिजनों की उपस्थिति में किया गया था। चंद्रशेखर आजाद की 116 वीं जयंती पर संगठन के कार्यकर्ताओं ने उनका स्मरण कर राष्ट्र भक्ति की शपथ ली। बरसते पानी में भी युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। तरुण शक्ति के कार्यकर्ताओं ने देश की आजादी के लिए प्राणोत्सर्ग करने वाले क्र ांतिकारी आजाद का जयघोष कर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्र म में श्याम सिंह ठाकुर, मुकेश पटैल,बबलू जायसवाल,अजय पटैल,संतोष उपाध्याय, विशाल सुरेखा, जीतू महाराज, महेंद्र पांडे, सतेंद्र मिश्र,मिंकू मिश्र,गौरव गोस्वामी ब्रजेश शर्मा,अभिनव ठाकुर,अभिषेक तिवारी, संजय तिवारी, शैलेन्द्र चतुर्वेदी, अजय,दीपक पांडे, अखिलेश शुक्ला,सोनू ठाकुर,अभय द्विवेदी, अंकित सिंघई ,रु कसार अंसारी फैजल अंसारी सहित बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता उपस्थित थे। 

बमतुल बुखारा को जानना भी जरूरी

स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिवीर चंद्रशेखर आजाद अपनी पिस्टल माऊजर को ‘बमतुल बुखारा’ नाम से पुकारते थे। आजाद को अंतिम समय में घेरने वाले अंग्रेज अफसर जॉन नॉट बावर को ब्रिटिश सरकार ने आजाद की यह पिस्टल बतौर गिफ्ट दी थी, जिसे उन्होने अपने घर में सजाकर रखा था। ऐसा माना जाता है कि अंग्रेज अफसर के मन में ये भाव था कि उसने भारत का बड़ा शेर मारा है। 1972 में तत्कालीन केंद्र सरकार व यूपी सरकार ने संयुक्त प्रयास कर यह पिस्टल बावर से मंगवाई थी और इसके भारत वापस आने के 6 माह बाद अंग्रेज अफसर की मौत हो गई। चंद्रशेखर आजाद के लिए की गई मुखबिरी का सवाल तो आज भी अनुत्तरित है।

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