दस्तावेजों में हेरफेर कर अहस्तांतरणीय भूमि बिकवा दी रसूखदार को
जबलपुर। बैहर तससील के ग्राम करौंदी, कुठीया, महगवां एवं गठौहा में आदिवासियों को आवंटित करोड़ों की जमीन सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर रसूखदार की कंपनी को बिकवाने का मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू एसपी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 54 एकड़ अहस्तांतरणीय भूमि के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर रमेश सिंह, टॉप ग्रेन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को विक्र य कर भ्रष्टाचार करने के मामले की जांच एसआई फरजाना परवीन ने करते हुए संबंधित कंपनी व तहसीलदार, पटवारी सहित राजस्व अमले के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
कलेक्टर की अनुमति बिना कर दिया नामांतरण आदेश
ईओडब्ल्यू को मिली शिकायत की जांच में पाया गया कि आरोपियों के विरूद्ध आपस में मिलीभगत कर आदिवासियों को शासन से प्राप्त 54 एकड़ अहस्तांतरित शासकीय भूमि को मामूली रकम पर क्र य करने व विधि विरूद्ध तरीके से नामांतरण कर करोडों रूपये का भ्रष्टाचार किया गया है। आरोपी रमेश सिंह ने तहसील बरही में पदस्थ तत्कालीन तहसीलदारों एवं पटवारियों की मिलीमगत से ग्राम करौंदी कुठीया महगवां एवं गठौहा की 54 एकड भूमि जो कि शासकीय पटटेदार, भूदान धारक तथा अहस्तातरणीय भूमि थी। जिसको मामूली रकम देकर वर्ष 2008 में क्र य किया गया । तहसीलदार एसके गर्ग एवं आर पी. अग्रवाल तथा आर.बी. द्विवेदी द्वारा अभिलेखों की जांच किये बगैर शासकीय पट्टे की भूमि में बगैर कलेक्टर की सक्षम अनुमति लिये नामांतरण पारित किया गया है। पटवारी नत्थूलाल रावत एवं संतोष दुबे (जूनियर),सतोष दुबे (सीनियर) एवं सुखदेव सिंह भवेदी द्वारा अभिलेखों में पूर्व वर्षों का अभिलेख रोस्टर न कर उक्त खसरे की भूमि में भूमि-धारकों को भूमिस्वामी दर्ज किया गया है। तहसीलदारों एवं पटवारियों द्वारा भूमि का नामांतरण भी दर्ज करा दिया गया। कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने में तहसीलदार पटवारी आदि की भूमिका रही। आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी भादवि एवं 7 (सी) श्र.नि.संशोधन अधिनियम, 2018 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया ।
