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तीन-तीन सांसद टापते रह गए, जबलपुर से छिन गया जैविक-प्राकृतिक खेती केंद्र

मप्र सरकार नहीं दे सकी जमीन, कार्यालय की नागपुर में शिफ्ंिटग शुरू 

जबलपुर। तीन-तीन सांसद होने के बाद भी शहर में स्थापित भारत सरकार के कृषि मंत्रलय द्वारा संचालित मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के लिए अति उपयोगी जैविक और प्राकृतिक खेती केंद्र आखिर जबलपुर से छिन गया। इस केंद्र की महाराष्ट्र के नागपुर में शिफ्टिंग होना शुरू हो गई है। राज्य शासन द्वारा मात्र दो गज जमीन नहीं दे पाने के कारण यह हालात बन गए हैं जबकि जबलपुर सहित समूचे मध्यभारत के किसानों के लिए लाभकारी इस केंद्र को जमीन देने अनेक बार पत्रचार केंद्रीय मंत्रलय और स्थानीय पदस्थ अधिकारियों द्वारा मुख्य और प्रमुख सचिव राज्य सरकार से लेकर कलेक्टर जबलपुर तथा उप संचालक कृषि कार्यालय तक किया जा चुका था। 

राकेश सिंह व विवेक तन्खा ने दिया था आश्वासन

 हैरानी की बात यह है कि विगत दिनों जब यह मामला प्रकाश में आया था उस समय सांसद राकेश सिंह, राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा से लेकर प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल तक ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से बातचीत कर यह आश्वासन दिया था कि जबलपुर से इस केंद्रीय कार्यालय को कहीं और शिफ्ट नहीं होने दिया जाएगा। बता दें कि एकमात्र जैविक खेती केंद्र से उर्वरक और मिट्टी की जांच, किसानों को प्रशिक्षण जैसे अनेक कृषि कार्य को बढ़ावा देने वाले कार्य संचालित किए जा रहे थे। स्वयं का कार्यालय नहीं होने के कारण कई सालों से इसे किराए के भवन में संचालित किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि बढ़-चढ़ कर दावा करने वालों के हरकत में आने के बावजूद मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए अति उपयोगी इस दफ्तर की शिफ्टिंग करने से पहले न तो किसी रजिस्टर्ड किसान संगठन से राय मशविरा किया गया न ही किसी जिम्मेदार ने किसानों को विश्वास में लिया। यह हालत तब है जबकि अन्य राज्यों में केंद्र यथावत हैं यानि यह भेदभाव सिर्फ जबलपुर के साथ किया गया है। 

कई संगठन सक्रिय, याचिका,ई-मेल से विरोध जताया

 इधर ,इसकी जानकारी मिलते ही नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच हरकत में आ गया है। मंच ने नीति आयोग में आवेदन कर तत्काल इस शिफ्टिंग पर स्थगन आदेश जारी करने मांग की है। मंच का कहना है कि यह किसानों के साथ भेदभाव है। उधर, किसान समाज संगठन के राष्ट्रीय महासचिव अखिलेश शारदानंद पटेल आदि इस शिफ्टिंग का विरोध कर रहे हैं। हाल ही में अनेक संगठनों द्वारा सूचना अधिकार के अंतर्गत ली गई जानकारी के आधार पर अनेक खुलासे किए गए हैं। फिलहाल इस मामले पर अब स्थानीय अधिकारी भी कुछ बोलने से बच रहे हैं। पता चला है कि केंद्र को शिफ्ट करने का प्रस्ताव मौजूदा निदेशक प्रभारी ने ही दिया है जिसे केंद्रीय मंत्रलय ने मंजूर कर लिया।

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