भोले के भक्त कांवड़ियों की पदयात्र ने रच दिया इतिहास
जबलपुर। सावन माह का दूसरा सोमवार भोले के भक्तों के उत्साह के नाम रहा। करीब 35 किलोमीटर की कांवड़ यात्र और गुप्तेश्वर महादेव की शाही सवारी ने दो साल बाद एक और इतिहास रच दिया। शहर चारों खूंट जाम रहा, लेकिन भक्तों के उत्साह से कदम मिलाते राहगीर और वाहन चालक भी गंतव्य को रवाना हो रहे थे। महादेव की शाही सवारी ऐतिहासिक गुप्तेश्वर मंदिर से पूर्व पार्षद द्वारका मिश्र के संयोजन व स्वामी मुकुंददास महाराज के सानिध्य में शुरू हुई जिसका स्वरूप बढ़ता गया और ब्लूम चौक पर शाही सवारी यात्र का संयोजन पूर्व पार्षद व कांग्रेस नेता पंकज पाण्डेय ने संभाला। इस भव्य आयोजन में मेयर जगत बहादुर सिंह अन्नू सहित तमाम कांग्रेस व भाजपा के नेता शामिल हुए। मार्गो की व्यवस्था में पुलिस प्रशासन को कई घंटे भारी मशक्कत करना पड़ी।
मटामर तक कांवड़ियों का उत्साह बढ़ता ही रहा
संस्कार कांवड़ यात्र भक्तिभाव के साथ सुबह 7 बजे गौरी घाट से प्रारंभ हुई जिसमें व्रतधारी महिलाएं, बच्चे व पुरुष नंगे पैर मां नर्मदा का पूजन कर जल कांवड़ में लेकर मटामर स्थित कैलाश धाम के लिए रवाना हुए। जबलपुर की यह कांवड़ यात्र प्रदेश में सबसे बड़ा आयोजन बन गई है जिसमें भोले के भक्तों का उत्साह व आस्था देखने लायक होता है। यात्र के संयोजक शिव यादव व नीलेश रावल ने सहयोगियों के साथ कांवड़ यात्र में शामिल हजारों नर-नारियों को व्यवस्थित तरीके से कैलाश धाम तक ले जाने रूट तय किया था, जिसमें पुलिस ने यातायात की व्यवस्था करने का भरपूर प्रयास किया। कांवड़ यात्र मार्ग में करीब 3 सौ स्वागत मंच बनाए गए थे जहां पर ढोल नगाड़ों के साथ कांवड़ियों का स्वागत किया गया। भोले भक्त कांवड़ के एक पात्र में नर्मदा जल तो दूसरे पात्र में देवपौधा लेकर चलते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे थे।
