पार्षद पद के प्रत्याशियों में टिकट की बेकरारी, अंदरूनी बवाल से नेताओं की किरकिरी
जबलपुर। भाजपा में पार्षद पद के प्रत्याशियों की सूची का इंतजार और उसमें बदलाव की चर्चा के बीच पार्टी के हर कार्यकर्ता के मोबाइल फोन पर सूची वायरल हो रही है। इस बार का नगर निगम चुनाव टिकटों की लेटलतीफी के लिए भी जाना जायेगा। सोशल मीडिया में वायरल सूची ने भाजपा में भूचाल ला दिया है। सूची अधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई, लेकिन इसमें शामिल नामों पर विश्वास इसलिए किया जा रहा है क्योंकि संभागीय चयन समिति में शामिल सदस्यों ने अपनों को टिकट पक्की होने की जो जानकारी दी वह इससे मिलती जुलती है। इससे पहले किसी चुनाव में टिकटों को लेकर इतना इंतजार नहीं देखा गया। भाजपा की सूची फाइनल होने के दावे पांच दिन से किए जा रहे हैं, लेकिन हर दिन कोई न कोई पेंच फंस जाता है।
गुटबाजी के चर्चे, रात में पहुंचे संगठन पदाधिकारी को घेरा महिलाओं ने
अनुशासन का पर्याय मानी जाने वाली भाजपा में जो कभी नहीं हुआ वो इस बार हो रहा है। इसका कारण सीधे तौर पर गुटबाजी और वर्चस्व की कहानी सामने आ रही है। भोपाल में पॉवर रखने वाले चयन समिति के दो चेहरों के माध्यम से अपना हित साध रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इसी दबाव में नाम हटवाए-जोड़े जा रहे हैं। इसकी भनक से स्थानीय जनप्रतिनिधि व संगठन भी भौचक है। अजीब हो चुके माहौल के बीच हताश-निराश कार्यकर्ता यहां-वहां दौड़ने विवश हैं। जिसे जहां भी आशा दिखती है, वो उसके पीछे दौड़ पड़ता है। इसका प्रमाण कल रात तब मिला जब छिंदवाड़ा जा रहे संगठन के एक नेता के यहां होने की खबर सुनकर कार्यकर्ता उनके पास दौड़ पड़े। महिलाओं ने उन्हें घेर लिया और कहा कि जब वार्ड महिला है तो उसमें महिला मोर्चा की सक्रिय कार्यकर्ता की बजाय नेता की पत्नी को क्यों टिकट दी जा रही है। उन्होने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वे छिंदवाड़ा के प्रभार में हैं इसलिए कोई मदद नहीं कर सकते। वहीं पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी वहां से खिसक लिए।
कांग्रेस में दिखाया जा रहा खाता-बही, आज आ सकती है सूची
वहीं कांग्रेस की सूची में चारों विधानसभा के कुल 22 वार्ड फंसे हैं। इनमें से 17 वार्ड की गुत्थी दोपहर तक सुलझा लेने की बातें सूत्रों ने बताई है, लेकिन पांच वार्ड तब भी ऐसे हैं, जिनको लेकर फैसला कठिन हो रहा है। प्रयास किये जा रहे हैं, कि इन सभी की गुत्थी सुलझा कर एक साथ सूची घोषित की जाएगी। बताते हैं कि यदि ऐसा न हो पाया तो पांच टिकटों को रोक कर बाकी की सूची शाम तक जारी कर दी जायेगी। कांग्रेस ने विरोध रोकने का बढ़िया तरीका ढूंढ निकाला है। टिकटें उन्हीं को दीं जा रहीं हैं, जिन्हें देना छत्रप चाह रहे हैं। विरोध होने पर वे खाता-बही की बात कर रहे हैं। टिकट मांगने वालों से कहा जा रहा है कि आपने कितनी बहियां भरवाईं, कितने सदस्य बनवाये? अब बताया जा रहा है कि एक हजार सदस्य बनाने वालों को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि कई ऐसे चेहरे भी विरोध कर रहे हैं, जिन्हें पर्याप्त सदस्य बनाये जाने के बाद भी टिकट नहीं दी गई है।