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भाजपा में सुलगी विरोध की आग, पार्षद टिकट में परिवार वाद और गुमनाम चेहरों की मुखालफत

इस्तीफा लेकर पहुंचे संभाग कार्यालय, सांसद निवास पर हंगामा, बहू-बेटी, भाई-भाभी को दी टिकट 

जबलपुर। भाजपा में पार्षद टिकट सूची बाहर आने से पहले पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं में विरोध की आग सुलग गई है। संभागीय चयन समिति में सभी 79 वार्डो के दावेदारों पर की गई चर्चा के बाद अधिकारिक तौर पर प्रत्याशियों के ऐलान के पहले सदस्यों के करीबियों के जरिए बाहर आ गए नामों पर पार्टी में भूचाल आ गया। पार्टी की गाइड लाइन को दरकिनार रखकर भाई-भाभी, बहू-बेटी और बहन-रिश्तेदार को टिकट मिलने की अपुष्ट सूचना के बाद भड़के दावेदारों ने समर्थकों के साथ भाजपा कार्यालय कूच किया और बुधवार की सुबह विरोध के साथ ही इस्तीफा देने के इरादे से एकत्र हुए। कार्यालय में पदाधिकारी न मिलने से असंतुष्टों की भीड़ सांसद राकेश सिंह के निवास पहुंची और भारी हंगामा किया। 

समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं

 आखिर वही हुआ जिसका अंदेशा था। भाजपा की पार्षद सूची आने के पहले ही पार्टी के

भीतर खाने में बवाल गया। जिन्हें टिकट दिए जाने की खबरें बाहर आईं हैं, उनके विरोध में कार्यकर्ता इस्तीफा देने तक उतारू हो गए हैं। विरोध की आग की खबर से नेता-जनप्रतिनिधि चेहरा छिपाने की स्थिति में आ गए। इस्तीफा देने पहुंचे नेता-कार्यकर्ताओं को जब पदाधिकारी नहीं मिले, तो उन्होने प्रदेश अध्यक्ष व सीएम शिवराज के कार्यालय अपनी बात पहुंचाने का जतन किया। नाराज कार्यकर्ताओं का कहना था कि सालों साल पार्टी का काम करने वाले कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करते हुए पार्टी की गाइड लाइन के विपरीत पार्षद पद की टिकट तय की जा रही हैं, जो स्वीकार नहीं है। बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने महिला मोर्चा में सक्रिय नेताओं को उपेक्षित रखने का उदाहरण देकर कहा कि जो महिला घर से नहीं निकली उनके पति ने टिकट दिला दी।

 अनारक्षित वार्ड में आरक्षित वर्ग का प्रत्याशी भी बर्दाश्त नहीं

 विरोध को देखते हुए ये सवाल भी उठ रहा है कि जो नाम पार्टी की चयन समिति ने तय किए, वे बाहर कैसे आ गए। वार्ड और नाम लेकर कहा जा रहा है कि नेताओं ने कहीं अपनी बहू, कहीं पत्नी, कहीं पुत्र तो कहीं भाई को टिकटें दीं हैं। जीतने योग्य तो छोड़ो जानने योग्य प्रत्याशी भी नहीं तय किए गए। यह भी कहा गया कि अनारक्षित वार्ड से आरक्षित वर्ग का प्रत्याशी देने से मतदाताओं में भारी नाराजगी है। नगर अध्यक्ष, विधायक, और विधायक चुनाव हार चुके नेताओं को फोन कर कार्यकर्ता कह रहे हैं कि बाहरी चेहरों को टिकट क्यों दी जा रही है। कुछ ऐसे लोगों को भी टिकट दी गई हैं जो न तो पार्टी के सदस्य हैं, न ही किसी कार्यक्रमों में आते-जाते कभी देखे गए। जो लोग विरोध दर्ज करा रहे हैं, उनमें कई पुराने नेता, कई वर्तमान बूथ अध्यक्ष, कई मंडल पदाधिकारी शामिल रहे। 

सांसद बोले- कार्यकर्ता को अपनी बात कहने का अधिकार

 असंतुष्टों की भीड़ सांसद निवास पहुंचकर अपना विरोध दर्ज करा रही थी। वहीं सांसद राकेश सिंह ने मीडिया से कहा कि कई दावेदार होने से किसी एक को टिकट देने पर विरोध स्वाभाविक है, लेकिन कार्यकर्ता को अपनी बात कहने का अधिकार है। उन्होने परिवारवाद के सवाल पर कहा कि कहीं-कहीं जीतने की क्षमता देखकर टिकट तय की जाती है। सांसद ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता अनुशासन में रहकर पार्टी को जिताने का काम करता है।

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