भूकम्प की 25 वीं बरसी पर पीड़ितों की सेवा करने वाले श्रमवीरों का किया सम्मान
जबलपुर। भूकम्प त्रसदी के 25 वीं बरसी पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटैल ने एक बार फिर ऐलान किया कि वे वोट मांगने कभी कोसमघाट नहीं आएंगे। 22 मई 1997 की भयावह त्रसदी में कोसमघाट भूकम्प का केंद्र रहा, जहां प्रहलाद पटैल ने एक माह दिन-रात डेरा डालकर सहयोगियों के साथ पीड़ितों की सेवा की थी और उनके ध्वस्त मकान बनाने का काम किया था। यहां आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने कारसेवा करने वाले श्रमवीरों का सम्मान किया।
कोई दिक्कत होगी तो जरूर आएंगे कोसमघाट
कोसमघाट में सेवा कार्य के बाद एक कांग्रेस नेता की टिप्पणी में ऐसा कुछ कह दिया गया था कि प्रहलाद पटैल ने 1997 में घोषणा की थी कि वे 12 साल इस गांव में नहीं आएंगे। मार्मिक भाषण में उन्होने कहा कि आपदा या किसी भी सेवा कार्य में श्रेय लेने की राजनीति से वे हमेशा दूर रहे हैं और इसीलिए उन्होने 12 साल कोसमघाट में कदम नहीं रखा। 13 वें साल वे अपने परिवार के साथ आए थे और अब 25 साल पूरे होने पर उन श्रमवीरों का सम्मान करने यहां आए जिन्होने दिन-रात परिश्रम कर पीड़ितों के आशियाने बनाए। केंद्रीय मंत्री ने एक बार फिर कहा कि वे वोट मांगने कोसमघाट कभी नहीं आएंगे, यदि कोसमघाट में कोई दिक्कत होगी तो जरूर आएंगे।
रोज 10 रुपए मांगने वाले को प्रहलाद ने किया याद
दिल को छू लेने वाले भाषण में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटैल कई बार भावुक हो गए। भूकम्प पीड़ितों के बीच बिताए समय को याद करते हुए उन्होने एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र किया जो रोज 10 रुपए मांगता था। मानसिक रूप से कमजोर यह व्यक्ति 10 रुपए से ज्यादा देने पर लेता नहीं था। चूंकि वे 12 साल कोसमघाट न आने का संकल्प ले चुके थे, लेकिन जब 13 वें साल पहुंचे और उन्होने उस व्यक्ति के बारे में पूछा तो लोगों ने बताया कि वो पेड़ के नीचे बैठा है। प्रहलाद जब उसके करीब पहुंचे तो उसने यह कहकर लौटा दिया कि जाओ.. ..हम तुमसे नाराज हैं।
गोटेगांव के सहयोग क्रीड़ा मंडल को दिया सेवा का श्रेय
25 साल पहले भूकम्प से कोसमघाट का एक भी मकान साबुत नहीं बचा था, लेकिन 25 साल बाद हिम्मत और सामथ्र्य से तस्वीर बदली हुई है। उन्होने गोटेगांव के सहयोग क्रीड़ा मंडल के नौजवानों को श्रेय देते हुए कहा कि जब चौतरफा हालाकार मचा था तब वे इस संस्था के सदस्यों से ही सेवा-सहयोग के लिए कह सकते थे। संस्था के नौजवानों ने घर-परिवार छोड़कर यहां एक माह तक श्रमदान किया। उस समय सहयोग क्रीड़ा मंडल का कोई भी सदस्य 20 साल से ज्यादा उम्र का नहीं था। प्रह्लाद पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपदा में अवसर की प्रेरणा देते हैं तो कोसमघाट से बड़ा कोई उदाहरण नहीं। उन्होने आपदा को विश्व स्तर पर सामने लाने में भूमिका निभाने वाले पत्रकारों व कैमरामैन एवं प्रतिदिन पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराने वाले सिख समाज के लोगों को भी सम्मानित किया। कार्यक्र म मे मौजूद पूर्व मेयर डॉ स्वाती सदानंद गोडबोले, भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं रेलवे बोर्ड के मेम्बर डॉ अभिलाष पांडे,मप्र भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ के संयोजक शरद अग्रवाल ने भी श्रमवीरों का सम्मान किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री की जीवन संगिनी पुष्पलता पटैल बेटी व बेटे के साथ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र वाजपेयी ने किया।