कांग्रेस में बदलाव का दौर, मिशन-2023 पर फोकस
भोपाल। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी लहार के विधायक 71 वर्षीय के डॉ गोविंद सिंह को सौंपी गई है। समाजवादी पृष्टभूमि के डॉ. सिंह दबंग व जुझारू नेता माने जाते हैं और वर्तमान में वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हैं। डॉ गोविंद सिंह मध्यप्रदेश कांग्रेस के एकमात्र ऐसे विधायक हैं, जो लगातार सातवीं बार विधानसभा पहुंचे हैं।
15 साल बाद कमलनाथ के नेतृत्व में हुई थी वापसी
कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे और अब वे पूरा फोकस मिशन-2023 पर करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कमलनाथ के पास जिम्मेदारियां बढ़ गई थीं। प्रदेश अध्यक्ष के साथ नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी में उनकी दोहरी भूमिका हो गई थी। पार्टी आलाकमान ने इसको देखते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष की भूमिका से मुक्त कर दिया गया है। 2018 में कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष रहते कांग्रेस की 15 साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी हुई थी, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया से टकराव के बाद बदली परिस्थितियों में सिंधिया गुट की बगावत के कारण मार्च 2020 में कमलनाथ को अपनी सरकार गंवानी पड़ी। कांग्रेस बहुमत से दूर, लेकिन 93 विधायकों के साथ मजबूत विपक्ष के रूप में खड़ी है।
कांग्रेस आलाकमान ने कई राज्यों में किए बदलाव
कांग्रेस आलाकमान कई राज्यों में बदलाव कर रही है। अब तक पंजाब, गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में बदलाव हो चुके हैं। वहीं कहा जा रहा है कि जल्द ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान किसी नए व्यक्ति को सौंपी जाएगी। साथ ही कुछ महासचिव व सचिवों की भी छुट्टी हो सकती है। जिन राज्यों में कांग्रेस की सत्ता बची है उनमें राजस्थान भी महत्वपूर्ण है। इस राज्य में सीमए अशोक गहलोत और युवा तुर्क सचिन पायलट गुट के बीच टकराव पिछले तीन साल से लगातार जारी है। टकराव खत्म करने के लिए कांग्रेस आलाकमान की ओर से बार-बार प्रयास किया जा रहा है, लेकिन विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जबकि सचिन पायलट के प्रदेश अध्यक्ष रहते पार्टी ने सत्ता में वापसी की, लेकिन लंबे समय से वे सरकार और संगठन में नहीं हैं। यहां भी बदलाव की चर्चा है।