हाईकोर्ट ने कैट के स्टे को खारिज किया
जबलपुर। आर्थिक अनियमितता के केस में उलङो राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एसआर मोहंती को हाईकोर्ट से झटका लगा है। मप्र उद्योग विकास निगम में आर्थिक गड़बड़ी के ईओडब्ल्यू में दर्ज प्रकरण में हाईकोर्ट जस्टिस शीलू नागू व जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की बैंच ने निर्देश दिए हैं कि मोहंती पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रहेगी। पूर्व सीएस मोहंती ने कहा है कि वे इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज प्रकरण को दिसंबर 2018 में बंद करने और राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद फिर से चालू करने के मामले में कैट द्वारा लगाए गए स्टे को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। स्टे को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चैलेंज किया था। मामले में राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता स्विप्नल गांगुली ने पक्ष रखा, वहीं आइएएस एसआर मोहंती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सिंह और प्रवीण दुबे ने पैरवी की।
जुलाई 2004 में बना प्रकरण
कमलनाथ सरकार में प्रदेश के मुख्य सचिव बने एसआर मोहंती सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने 24 जुलाई 2004 को आर्थिक अनियमतिता का प्रकरण दर्ज किया था। इसमें आरोप है कि मप्र उद्योग विकास निगम के एमडी रहते हुए मोहंती ने उस दौर में कई कंपनियों को पूर्व अनुमति के बगैर सैकड़ों करोड़ का कर्ज दिए थे। यही मामला आगे चलकर उनके लिए मुसीबत बन गया। 0़2 जनवरी 2007 को ईओडब्ल्यू की चार्जशीट के जरिए अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ की गई थी, जो राज्य में सत्ता बदलने के बाद जांच समाप्त कर दी गई थी।
जुलाई 2021 में कैट ने निरस्त कर दिया था
दिसंबर 2018 में कमलनाथ की अगुवाई में सरकार बनी तो नए मुख्य सचिव के तौर पर आरएस मोहंती का नाम सामने आया, लेकिन आर्थिक अनियिमतता वाले केस को लेकर पेंच फंसा था। 26 दिसंबर 2018 को तत्कालीन महाधिवक्ता ने अनुशासनात्मक कार्रवाई बंद करने का अभिमत दिया। इस पर 28 दिसंबर 2018 को राज्य सरकार ने अमल करते हुए जांच बंद कर दी। भाजपा सरकार ने 4 जनवरी 2021 को कांग्रेस सरकार के उक्त आदेश को निरस्त कर एक बार फिर मोहंती के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को पुनर्जीवित कर दिया। मोहंती ने इस आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की जबलपुर बेंच में चुनौती दी। 8 जुलाई 2021 को कैट ने इस आदेश को स्थगित कर दिया।
