सदर की सोनी दम्पती सहित गारंटर पर जांच का शिकंजा
जबलपुर। सदर में रहने वाले सोनी दम्पती ने केन्टोन्मेंट बोर्ड की फर्जी एनओसी के जरिए बैंक से 60 लाख रुपए का लोन ले लिया। फाइनेंसर बैंक ने जब एनओसी की जांच की तो पता चला कि यह फर्जी है, जिसके बाद मामले की शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में की गई। ईओडब्ल्यू एसपी देवेंद्र प्रताप सिंह राजपूत ने बताया कि इंस्पेक्टर मुकेश खंपरिया ने बैंक की शिकायत पर जांच के बाद आरोपी प्रमेश सोनी, उनकी पत्नी तनुजा व गारंटर के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 120 बी का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है ।
अचल सम्पत्ति गिरवी, बेच दी दुकानें
मामले की जानकारी देते हुए एसपी देवेंद्र प्रताप सिंह राजपूत ने बताया कि जांच में पाया गया कि सिटी कन्जूमर फायनेंस इंडिया लिमिटेड की सदर ब्रांच द्वारा 30 अगस्त 2008 को 49 लाख रु पये का लोन प्रमेश सोनी पिता रामकृष्ण सोनी एवं तनुजा सोनी पति प्रमेश सोनी निवासी सदर बाजार केंट जबलपुर के नाम स्वीकृत किया गया था। अधिक आवश्यकता होने पर प्रमेश सोनी एवं तनुजा सोनी द्वारा 15 अप्रेल 2010 को लोन की राशि बढ़ाकर 60 लाख रु पये की मांग की गई, जिस पर उन्हें लोन राशि बढ़ाकर 60 लाख रु पये स्वीकृत कर दी गई। लोन ब्याज दर 13 प्रतिशत थी एवं कुल अवधि लगभग 180 महीनों की दी गईं थी। उक्त लोन प्राप्त करने के लिए गारंटी के रूप में प्रमेश सोनी एवं तनुजा सोनी, चंद्रावती सराफ ने अचल सम्पत्ति जो कि मकान नं-62 ए, 62 ब, 62 स, एवं 63 का कुल प्लाट एरिया 605 वर्गफुट जिसमें निर्मित क्षेत्रफल 181 वर्गफुट जो केंट बोर्ड जिला एवं तहसील जबलपुर में स्थित है, बंधक रखी गई। इस संबंध में प्रमेश सोनी एवं चंद्रावती सराफ द्वारा उक्त सम्पत्ति को गिरवी रखने हेतु एक कूटरचित एनओसी दिनांक 29 अगस्त 2008 बैंक के समक्ष जमा की गई थी जिसमें केंट बोर्ड की फर्जी एनओसी को असली दस्तावेज के रूप में पेश किया गया। इसके साथ ही फायनेन्स कंपनी में बंधक (मार्डगेज) सम्पत्ति को सही तथ्यों को छुपाकर एवं गलत तथ्यों का आधार बनाकर क्रेतागणों को दुकान क्र मांक-1, 2, 3, 4, 5 एवं 6 बेच दी गई । इसके बाद आरोपियों ने बैंक के लोन की अदायगी भी नहीं की, तब बैक को फर्जी एनओसी का पता चला और मामला ईओडब्ल्यू को सौंपा गया।
