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मेडिकल की डॉक्टर दम्पती के घर ईओडब्ल्यू की रेड, करोड़ों की सम्पत्ति उजागर

एमयू में एग्जाम कंट्रोलर रहीं डॉ तृप्ति गुप्ता, पति अशोक साहू मेडिकल कॉलेज में 

जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में बायोकेमिस्ट्री विभाग में पदस्थ डॉक्टर तृप्ति गुप्ता व उनके पति प्रोफेसर अशोक साहू घर तड़के 5 बजे ईओडब्ल्यु की टीम ने छापा मार कर करोड़ों की सम्पत्ति उजागर की है। डॉक्टर दंपती द्वारा भ्रष्टाचार कर जुटाई गई करोड़ों रु पए की दौलत का खुलासा होते ही मेडिकल कॉलेज व मेडिकल यूनिवर्सिटी में खलबली मच गई। डॉ तृप्ति गुप्ता मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (एमयू)में परीक्षा नियंत्रक और डिप्टी रजिस्ट्रार भी रह चुकी हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एसपी देवेंद्र प्रताप सिंह राजपूत के निर्देश पर सुबह 5 बजे डीएसपी मनजीत सिंह के नेतृत्व में ईओडब्ल्यू की टीम ने डॉक्टर अशोक साहू एवं तृप्ति गुप्ता के घर पर छापा मारा। जांच निरीक्षक स्वर्ण जीत सिंह धामी ने प्राथमिक जांच में पाया, कि डॉक्टर अशोक साहू एवं डॉक्टर तृप्ति गुप्ता की वैध कुल आय 3 करोड़ 15 लाख 13 हजार 308 रु पए होना पाया गया है। इसी अवधि में इनके द्वारा कुल 5 करोड़ 44 लाख 22 हजार 521 रु पए की संपत्ति अर्जित एवं व्यय करना पाया गया है। आरोपी दंपती द्वारा उनकी आय से करीब 72 प्रतिशत अधिक व्यय संपत्ति अजिर्त करना पाया गया है। दोनों डाक्टरों के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। प्रकरण की विवेचना निरीक्षक प्रेरणा पांडे द्वारा की जा रही है। 

अब तक मिली इतनी संपत्ति- 

-भूखंड क्र मांक 54 सीओडी कॉलोनी, जबलपुर -भूखंड क्र मांक एमआईजी 516 में मेन रोड धनवंतरि नगर, जबलपुर -भूखंड क्र मांक एमआईजी 517 में मेन रोड धनवंतरि नगर, (कीमत करीब 1 करोड़ 56 लाख 90 हजार 944 रु पए) - उपरोक्त भूखंड पर भवन निर्माण व्यय कीमत करीब 2 करोड़ 34 लाख 53 हजार 208 रु पए) -एलआईसी में 5 लाख 68 हजार 256 रु पए का निवेश -एक टोयोटा कार खरीदने में करीब 7 लाख 40 हजार 913 रु पए

 मेडिकल के एक दर्जन अधिकारी-कर्मचारी ईओडब्ल्यू के रडार पर

 मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ आलोक साहू व उनकी पत्नी डॉ तृप्ति गुप्ता के घर आय से अधिक संपत्ति की चल रही जांच के बीच खबर मिली है कि भ्रष्टाचार के मामले में मेडिकल कॉलेज के एक दर्जन अधिकारी-कर्मचारियों पर ईओडब्ल्यू टीम की नजर है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को पूर्व में भष्ट्राचार से संबंधित शिकायतें मिली हैं, जिनकी विस्तृत जांच गोपनीय तरीके से शुरू कर दी गई है। इधर ईओडब्ल्यू की जांच-पड़ताल के बीच लोक निर्माण विभाग की टीम डॉक्टर दंपती के आलीशान मकान का आंकलन करने पहुंच गई। डॉक्टर तृप्ति गुप्ता और पति प्रोफेसर अशोक साहू के घर में छापा पड़ने के बाद से ही मेडिकल यूनिवर्सिटी में सन्नाटा पसरा रहा।

 एग्जाम कंट्रोलर रहते विवादों से घिरी रहीं डॉ तृप्ति

बताया जाता है कि विभाग में रहते हुए डॉक्टर तृप्ति गुप्ता का नाता विवादों और शिकायतों से घिरा रहा है। तृप्ति गुप्ता द्वारा मेडिकल यूनिवर्सिटी में परीक्षा नियंत्रक रहते 24 छात्रों की परीक्षा निरस्त की थी व प्रयोगिक परीक्षा में सम्मलित न करने का आदेश दिया था, उसमे एक छात्र विशेष से आर्थिक लाभ लेकर महाविधालय विशेष को बिना संदर्भ पत्र बिना महाविद्यालय के पत्र आदेश कर नियम विरु द्ध छात्र डॉ. गीता चड्डा के लिए प्रायोगिक परीक्षा में सम्मलित कराने का आदेश जारी किया और अपात्र को एग्जाम दिलाया। तृप्ति गुप्ता द्वारा प्रभारी परीक्षा नियंत्रक रहते नर्सिग में वरिष्ठता को नजर अंदाज कर जूनियर व निजी महाविधालय के शिक्षक को प्रैक्टिकल में परीक्षक नियुक्त किया गया। सांठगांठ कर एक शिक्षक को 5 से 10 महाविधालय में प्रैक्टिकल लेने भेजा इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता की प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित नर्सिग महाविधालय के वरिष्ठों को नजरअंदाज किया गया। 

रीचेकिंग के नाम पर हेराफेरी

डॉ. तृप्ति गुप्ता ने परीक्षा नियंत्रक रहते हुए नर्सिग में वरिष्ठता को नजरअंदाज कर निजी महाविधालय के उन शिक्षकों को डीवीएस पर मेप कराया जो योग्यता नहीं रखते थे , लेकिन ऐसे शिक्षकों से इनके आर्थिक लाभ जुड़े हुए थे और ऐसे शिक्षकों से प्रतिदिन 100-से 500 तक उत्तरपुस्तिकाओं की जांच कराई जबकि सामान्य तौर पर 40 पेज की एक उत्तरपुस्तिका जांचने में औसत 4 से 6 मिनिट का समय लगता है और एक शिक्षक सामान्य तौर पर 3-4 घंटे ही उत्तरपुस्तिका चेक कर सकता मगर इनकी निजी महाविधालय के शिक्षकों के साठ गाठ के चलते यह कार्य हुआ था। अपने पति को मेडिकल संकाय में परीक्षा समन्वयक नियुक्त कर सबसे ज्यादा बायोकेमिस्ट्री विभाग में नंबरों की हेरफेर कराई और स्पॉट वैल्यूएशन एवं रीचेकिंग की आड़ लेकर छात्रों के नंबर बढ़ाये गए। 

नियमों की उड़ीं धज्जियां, एमयू में प्रतिनियुक्ति

डॉ तृप्ति गुप्ता द्वारा सेवा नियमों की धज्जिया उड़ाई जा रहीं थी, जिसका सीधा प्रणाम यह है कि जब शासन ने इन्हे प्रतिन्युक्ति पर विश्वविद्यालय में उप कुलसचिव के पद पर पदस्थ किया था तो इन्होने उस प्रतिनियुक्ति को अपने अनुसार तोड़ मरोड़कर दोनों विभाग में अपना कब्ज़ा जमाए रखा। अपने पति के विभागाअध्यक्ष होने का पूरा फायदा लिया और बिना उपिस्थति वेरिफिकेशन के नियम विरु द्ध मेडिकल महाविधालय से सेलरी प्राप्त कर रही थी,जो शासकीय सेवक का सेवा नियमों का उल्लंघन कदाचरण की श्रेणी में आता है ।

 2400 वर्गफीट में करोड़ों का मकान,पीडब्ल्यू ने किया आंकलन

2400 वर्ग फीट में करोड़ों की लागत से बना आलीशान मकान का कुछ समय पहले ही तैयार हुआ है। प्रोफेसर दंपती ने सामने फुटपाथ की लगभग 500 वर्ग फीट जमीन पर कब्जा कर उसमें निजी गार्डन बना लिया है। एसपी ईओडब्ल्यू देवेन्द्र सिंह राजपूत के मुताबिक प्रोफेसर दम्पती ने अकूत दौलत जमा की है। 12 साल से नौकरी कर रहे पति-पत्नी की वैध आय 3.15 करोड़ होती है। नौकरी दौरान दोनों ने 5.50 करोड़ की सम्पति बनाई है। मकान का पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से आंकलन कराया जा रहा है।

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