कार्यपरिषद की ली मंजूरी और नोटिफिकेशन भी जारी
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) सहित प्रदेश के सभी पारम्परिक विश्वविद्यालयों में आनन-फानन में सामान्य श्रेणी के शिक्षकों (प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर,अस्टिेंड प्रोफेसर) की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। दरअसल, विधानसभा में पारम्परिक विश्वविद्यालयों में सामान्य श्रेणी के शिक्षकों की भर्ती नहीं होने को लेकर सवाल उठाए गए थे। जिसके बाद सरकार ने विधानसभा में ऐलान कर दिया था कि जिन भी विश्वविद्यालयों में सामान्य श्रेणी के शिक्षकों के पद रिक्त हैं उनकी भर्ती को लेकर 31 मार्च तक नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। आरडीयू प्रशासन ने भी बुधवार 30 मार्च को कार्यपरिषद की बैठक बुलाते हुए शिक्षकों की भर्ती संबंधी प्रस्ताव को स्वीकृत कराते हुए शाम को ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके साथ ही भर्ती को लेकर आगे की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।
शिक्षकों की कमी का असर, गुणवत्ता भी घट रही
दरअसल, आरडीयू सहित प्रदेश के अन्य पारम्परिक विश्वविद्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों की भर्ती नहीं हो पा रही है। मुख्य रूप से रोस्टर को लेकर तकनीकी उलझने के चलते भर्ती प्रक्रिया रूक जाती थी। कई विश्वविद्यालयों के मामले तो न्यायालय तक पहुंच चुके हैं। इन हालातों में विश्वविद्यालयों में नियमित शिक्षकों की संख्या निरंतर घटती जा रही थी। आरडीयू में भी वर्तमान में नियमित शिक्षकों का आंकड़ा 35 के आसपास जा पहुंचा है, जबकि यूजीसी से करीब 197 पद स्वीकृत हैं। शिक्षकों की कमी का असर विश्वविद्यालय की शैक्षेणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा था। कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय में रिक्त सामान्य श्रेणी के शिक्षकों के पदों की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। बैकलॉग पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पूर्व से ही जारी है। जल्द ही विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी को दूर कर दिया जाएगा।
अगस्त में शासन के आदेश पर शुरू हुई थी बैकलॉग भर्ती
शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए शासन ने सबसे पहले विश्वविद्यालयों में 77 बैकलॉग पदों की पूर्ति करने के निर्देश दिए थे। आरडीयू में भी अगस्त में भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। आवेदनों को जमा करने की अंतिम 5 अक्टूबर थी, जिसके बाद अब आवेदनों की स्क्रूटनी चल रही है। बताया जाता है कि केवल बैकलॉग पदों में भर्ती किए जाने को लेकर ही विधानसभा में सवाल उठाए गए थे। जिसके बाद शासन ने आनन-फानन सामान्य श्रेणी के पदों के लिए प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे।
