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लायसेंस फीस बढ़ी तो परेशान शराब ठेकेदार, आबकारी को है टेंडर का इंतजार

करोड़ों का नुकसान होगा शासन को, 1 अप्रैल से नई दुकान खुलना मुश्किल

जबलपुर। नईआबकारी नीति के खिलाफ लामबंद शराब ठेकेदार बदलाव नहीं होने की सूरत में 1 अप्रैल से कई जिलों में दुकान नहीं खोलेंगे। यह हालात नई आबकारी नीति पर सरकार के रवैऐ और ठेकेदारों की अड़ी के चक्कर में बने हुए हैं। इसका असर भोपाल, इंदौर, जबलपुर-ग्वालियर समेत प्रदेश के 17 जिलों में दिखाई दे रहा है। यहां ठेकेदार शराब का ठेका लेने से पीछे हट रहे हैं। अब ऐसे में यदि वे ठेके नहीं लेते हैं 1 अप्रैल से भोपाल-इंदौर समेत 17 जिलों की 65 शराब दुकानें नहीं खुलेगी। ऐसे में सरकार को करोड़ों के रेवेन्यू का नुकसान हो जाएगा या फिर सरकार को ही ठेका चलाना पड़ेगा। हालांकि विभागीय सूत्र बता रहे हैं कि यदि 10 से 20 प्रतिशत तक लायसेंस फीस में कमी सरकार कर देती है तो हालात काबू में आ जाएंगे। उधर, बरेला में एमआरपी से ऊपर शराब बेचने और बिल न देने का वीडियो वायरल हो रहा है। 

ठेका लेने से बच रहे शराब ठेकेदार

 जबलपुर में हो रहे टेंडर में शेष रह गए 19 ग्रुप के टेंडर का इंतजार किया जा रहा है। बता दें कि जबलपुर में 45 ग्रुप में अभी तक सिर्फ 26 ग्रुप के ही टेंडर हुए हैं। इसमें अधिकतर दुकान ग्रामीण अंचल की हैं। इसके चलते आज दोपहर दो बजे से कलेक्टर कार्यालय स्थित आबकारी दफ्तर में यह प्रक्रिया पूरी की जाना है। यानि शहर में ठेकेदार सरकार की नई शराब नीति से अधिक घाटा होना मान कर चल रहे हैं। ठेके न लेने की तीन वजह प्रमुख रुप से हैं। इसमें देशी-अंग्रेजी शराब दुकानें एक ही जगह खोलना और मार्जिंन कम कर रिजर्व प्राइज बढ़ा देना है। इसके साथ ही माल उठाने पर पाबंदियां तय करने से भी ठेकेदार परेशान हैं। 

अभी तक 17 जिलों में कुल 35 ठेका ही नीलाम हो सके

 दरअसल नई नीति के तहत प्रदेश के 17 जिलों में सिंगल की जगह ग्रुप में दुकानों के टेंडर दिए जा रहे हैं। इनमें भोपाल, राजगढ, इंदौर, खंडवा, जबलपुर, छिंदवाडा, बालाघाट, कटनी, रीवा, सतना, उज्जैन, नीमच, सागर, ग्वालियर, शिवपुरी, भिंड और मुरैना जिले शामिल हैं। 2000-21 और 2021-22 में यह सिंगल ठेके की व्यवस्था थी। यानि एक ही ठेकेदार जिले की दुकानों का संचालन करते थे। 2022-23 के लिए 3-3 दुकानों के ग्रुप बना दिए गए हैं। यानी, ठेकेदार ग्रुप में दुकान चलाएंगे। इस नीति को लेकर ही ठेकेदार खफा है। वे दुकानें लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। 17 जिलों में एवरेज 35 ठेके ही नीलाम हो पाए हैं।

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