मुख्यमंत्री श्री चौहान का मानना है कि ग्राम स्तर पर ऐसे ग्रामीण इंजीनियर को तैनात
किया जाए जो विद्युत कनेक्शन, पेयजल प्रदाय व्यवस्था, सिंचाई पम्पों से संबंधित
प्रबंध, आवास निर्माण के तकनीकी पहलुओं आदि की जानकारी रखता हो। पम्प और वाल्व
ऑपरेटर का प्रशिक्षण कुछ ही दिनों में दिया जा सकता है। बेरोजगार युवाओं को इन
कार्यों
के लिए तीन से छह माह के छोटे प्रशिक्षण कोर्स का लाभ दिलवाकर ग्रामों में पेयजल
प्रदाय योजना और अन्य योजनाओं में मेन्टेनेंस का दायित्व सौंपा जाए। मध्यप्रदेश में इस
क्षेत्र में एक मॉडल तैयार कर उसके क्रियान्वयन की पहल की जाए। इसके लिए ग्रामीण
विकास विभाग नोडल विभाग की भूमिका का निर्वहन करे। बड़े ग्रामों में एक से अधिक
युवक भी यह जिम्मेदारी वहन कर सकते हैं।
