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एनिमिया से बचाव के लिए हीमोग्लोबिन की जांच जरूरी- सीएमएचओ


विदिशा 19 फरवरी 2022

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि एनिमिया (खून की कमी) इसका सही समय पर पहचाना नहीं जाये तो इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं। शारीरिक विकास में बाधा गंभीर रोग हो सकते हैं। गर्भावस्था में तो एनिमिया के कारण गर्भवती की जान का जोखिम भी हो सकता है। इसलिए सही समय पर खून की जांच करायें और उसका उपचार करायें।  सीएमएचओ डाॅ एपी सिंह ने सलाह दी है कि गर्भवती मातायें अपनी हीमोग्लोबिन जांच के साथ-साथ खान-पान का विशेष ध्यान रखें और गर्भावस्था के दौरान एनिमिया होने पर महिलाओं कोे विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि किसी महिला में खून की कमी है तो उसे आयरन की गोली दी जाती है। गर्भवती महिला को समय से भोजन करना चाहिए और साथ में फल, हरी सब्जियां, दालें व पोषक तत्व युक्त आहार लेना जरूरी है, जिससे स्वास्थ्य अच्छा बना रहे। एनिमिया की पहचान हीमोग्लोबिन लेवल जांच करने के बाद की जाती है। हीमोग्लोबिन लेबल 12 ग्राम से ज्यादा है तो एनिमिया नहीं माना जाता। 07 से 10 ग्राम है तो उसे मोडरेट एनिमिया कहते है जिसे खान-पान और आयरन की गोली द्वारा ठीक किया जा सकता है। 07 ग्राम से नीचे उसे सीवियर एनिमिया माना जाता है, जिसकी जांच कर उपचार कराना आवश्यक है। यह जांच सभी शासकीय स्वास्थ्य केन्द्र में निःशुल्क की जाती है। 






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