बतौर कलेक्टर 17 महीने के कार्यकाल में नवाचार भी रहा सुर्खियों में
जबलपुर। मात्र 17 माह के लिए जबलपुर कलेक्टर बने कर्मवीर शर्मा का कार्यकाल चुस्त और चौकस प्रशासन के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि चाहे कोरोनाकाल हो या एंटी माफिया सेल की कार्रवाई, नए-नए नवाचार और पब्लिक के बीच सहज-सुलभ उपलब्ध रहते हुए भी इस पीरियड में एक बार भी कानून और व्यवस्था बिगड़ने की नौबत नहीं आने दी। महामारी के दौरान फील्ड पर उतर कर काम करने और मिलावटखोरों पर एनएसए की कार्रवाई की शुरुआत सबसे पहले प्रदेश में करने के लिए भी कर्मवीर शर्मा याद किए जाएंगे
लॉ एंड आर्डर नहीं बिगड़ा कार्यकाल में
जिले में सीएए और एनआरसी आंदोलन के बाद से एक बार भी लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बने ऐसी स्थिति से जिला प्रशासन को दो-चार नहीं होना पड़ा, जानकारों के मुताबिक इसका सीधा कारण मुखिया का चौकस रहना और एसपी से समन्वय बनाना रहा। 17 महीने के कार्यकाल में कोविड इंन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने नए बिस्तर, बच्चों का आईसीयू वॉर्ड,सिहोरा सहित नए ऑक्सीजन प्लांट और गांव-गांव ऑक्सीजन कन्स्ट्रेटर पहुंचाने के साथ ही कोरोना की तीसरी लहर में बतौर कलेक्टर कर्मवीर शर्मा जुटे रहे। टीकाकरण अभियान में जरा सी लापरवाही पर कलेक्टर ने अफसरों के पंच टाइट किए। इसके अलावा कानून और व्यवस्था पर प्रशासन का शिकंजा कसने पुलिस के साथ मिल कर योजनाबद्ध तरीके से कर्मवीर शर्मा के कार्यकाल में 110 से ज्यादा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई वहीं ढाई सौ से अधिक बदमाशों का जिला बदर कर दिया गया। साथ ही बड़े-बड़े नामचीनों के अवैध कब्जे ध्वस्त करने में प्रशासन ने हेठी नहीं खाई। नतीजतन लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपए कीमती 35 एकड़ सरकारी जमीन रसूखदारों के कब्जे से मुक्त करा दी। वहीं चिटफंड कंपनियों के झांसे में उलङो 6 हजार परिवारों को राहत दिलाई और खनन माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रिकार्ड भी बनाया।
केयर बाय कलेक्टर से लेकर एनआरएलएम पर फोकस
एक जिला एक उत्पाद के तहत जबलपुर के हरे मटर को किसान से व्यापारी तक एक सूत्र में बांधने, जिले में मटर महोत्सव आयोजित कराने, निर्यात और ब्रांडिंग में कर्मवीर शर्मा ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। स्मार्ट सिटी के सभी प्रोजक्ट शुरू कराने में कर्मवीर शर्मा ने अहम रोल निभाया। कलेक्टर रहते कर्मवीर शर्मा के नवाचारों की बात की जाए तो केयर बाय कलेक्टर व्हाट्सअप ग्रुप ने जरूरतमंदों को आधी रात में मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही एनआरएलएम के तहत महिलाओं को स्व सहायता समूह से जोड़ने, यूनिफॉर्म उपाजर्न से जोड़ने में प्रशासन की सक्रियता दिखी।