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कम्युनिटी ट्रांसमिशन: ओमिक्रॉन के माइल्ड संक्रमण से घर-घर सर्दी-खांसी और बुखार के मरीज

नए वैरियंट के डिटेक्ट का इंतजाम न होने से उपचार में जुटे चिकित्सा विशेषज्ञ भी मान रहे 

जबलपुर। दो दिन बढ़ने के बाद कोरोना पॉजिटिव केस घटने से यह मान लेना घातक भी हो सकता है, कि संक्रमण की तीसरी लहर कमजोर हो रही है। महामारी पर चल रही रिसर्च और एक्सपर्ट्स की राय के मुताबिक संक्रमण का ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ हो चुका है और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने भी पहली बार स्वीकार किया है, कि ज्यादातर प्रदेश व जिलों में कम्युनिटी ट्रांसमिशन हो चुका है। स्थानीय चिकित्सा विशेषज्ञ भले ही उच्च स्तर पर चल रही रिसर्च के कारण खुलकर नहीं बोल रहे, लेकिन जिन विशेषज्ञों से बात की गई, उनमें ज्यादातर इसे खुला सच मान रहे हैं। उनका तर्क है, कि अकेले जबलपुर की बात की जाए तो किसी भी इलाके में शायद ही कोई घर ऐसा हो जहां सर्दी-जुकाम और बुखार से पीड़ित न हों। खास बात ये कि लोग टेस्ट कराने से बच रहे हैं और जो लोग वैक्सीनेट होकर भी सर्दी या बुखार से पीड़ित हैं, वे घर पर ही स्वस्थ होने की प्रत्याशा में उपचार ले रहे हैं। चूंकि ओमिक्रॉन का कोई टेस्ट या संक्रमण का दावा पुख्ता नहीं है तो यह माना जा रहा है, कि कोरोना के इस वैरियंट का मरीज पर ज्यादा बुरा असर नहीं हो रहा है। 

ओमिक्रॉन या उसके सब-स्ट्रेन बीए-2 के टेस्ट के कोई इंतजाम नहीं

चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं, कि सरकारी अस्पतालों या निजी अस्पतालों सहित फीवर क्लीनिक में पहुंचने वाले ज्यादातर मरीज सर्दी-बुखार से पीड़ित होते हैं और वे इसकी दवा लेकर घर जाना चाहते हैं। इनमें बहुत कम ऐसे होते हैं जो कोविड-19 का निर्धारित टेस्ट कराते हैं। वहीं नए वैरियंट ओमिक्रॉन या उसके सब-स्ट्रेन बीए-2 का प्रापर टेस्ट कराने के कोई इंतजाम ही नहीं है। जबकि सरकार की स्वीकारिता के बाद भी प्रशासन कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात नहीं कहता। जबकि मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, कि जीनोम सीक्वेंसिंग की निगरानी करने वाली और भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रलय के अंतर्गत काम करने वाली संस्था इंडियन एसएआरएस जीनोमिक्स कंर्सोटियम आईएनएसएसीओजी ने कहा है कि देश में ओमिक्र ॉन का कम्युनिटी ट्रांसमिशन हो रहा है।

 गले की नीचे नहीं उतर रहा, इसलिए माना जा रहा है संक्रमण माइल्ड

अधिकारिक तौर पर जबलपुर में ओमिक्रॉन का एक भी मरीज सामने आने की बात नहीं कही गई, लेकिन कोरोना के इलाज में पहली, दूसरी और तीसरी लहर में जुटे चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है, कि जिस पैमाने पर घर-घर में लोग सर्दी-खांसी या बुखार से पीड़ित हैं, उनमें संक्रमण जरूर है। चूंकि यह माना जा रहा है, कि कोरोना के नए वैरियंट ओमिक्रॉन या उसके सब-स्टेन बीए-2 का संक्रमण माइल्ड है और यह फिलहाल गले की नीचे उतरकर फैंफड़ों तक ज्यादा नहीं जा रहा है इसलिए गंभीर मरीजों की संख्या कम है और जो लोग वैक्सीनेट हैं, वे घर पर ही स्वस्थ हो रहे हैं।

 बिना ट्रेवल हिस्ट्री हो रहा कम्युनिटी ट्रांसमिशन

आईएनएसएसीओजी ने चेताया है, कि नए केस तेजी से बढ़ने के बीच बिना ट्रैवल हिस्ट्री वाले लोगों में भी ओमिक्र ॉन संक्र मण फैल रहा है। यह भी माना जा रहा है कि दूसरी लहर में सबसे तेज रहे डेल्टा वैरियंट की तुलना में ओमिक्रॉन के केस भले ही कम गंभीर हैं, लेकिन इससे खतरा बरकरार है और बिना ट्रेवल हिस्ट्री कम्युनिटी ट्रांसमिशन होने से आबादी के संक्रमित होने की संभावना बनी रहेगी। कम्युनिटी ट्रांसमिशन को स्पष्ट करते हुए विशेषज्ञ बताते हैं, कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन उन लोगों (कम्युनिटी) के समूह के भीतर संक्रमण का प्रसार (ट्रांसमिशन) है, जिनका वायरस से संक्रमित व्यक्ति या इसके कॉन्टैक्ट में आने वाले व्यक्ति के साथ कोई ज्ञात संपर्कनहीं है। यही वजह है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन ने चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2009 में स्वाइन फ्लू एच-1 एनए भी कम्युनिटी ट्रांसमिशन की वजह से फैला था।

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